Wednesday, 9 March 2016

बहुत कुछ कहना चाहता हूँ



बहुत कुछ कहना चाहता हूँ तुझसे मैं 
मगर फिर ठिठक कर रुक जाता हूँ मैं। 
हज़ारों ख्वाइशों के बिम्ब रोज सजाता हूँ मैं 
चौखट पर आ के तेरी सब भूल जाता हूँ मैं। 
ये भी तो नहीं कह सकता तुझे चाहता हूँ मैं 
अक्सर बहकावों में कितने बहक जाता हूँ मैं। 
तेरी सूरत,तेरी सीरत पर क्या कहूँ भला मैं 
अभी तो कुछ तुतलालना सीख रहा हूँ मैं। 
ये अलग बात है दीदार को तेरे तरसता हूँ मैं 
बावला हूँ मगर खुद में न ढूंढ पाऊँ तुझे मैं।
निगाहें-करम मुझ पर बड़ा है जानता हूँ मैं 
यूँ ही तो नहीं पंक में खिलता "नलिन" हूँ मैं।  

Tuesday, 8 March 2016

तैरा मेरा भी मन


तेरे दीदार को तरसता है मेरा मन 
जब से सुना है तेरे जलवोँ का फ़न। 
तुझे चाहने का दावा,मुझमें नहीं है ये दम 
मगर चाहने वाले कहाँ,हैं तेरे ज़रा भी कम।
तूने तो तैरा दिए #संग,भारी-भरकम 
तैरा मेरा भी मन,जाऊं तुझमें रम। 
थक हार के अब टूट गया है तन मन 
आत्मबल बढ़ा,देकर राज-चरन। 
विवेक,बल,शील बिना,मैं कम अक्ल 
अपना ले मुझको और कर दे निर्मल। 
#संग=पत्थर 

Monday, 7 March 2016

शिवोहम



साईं के अलावा मुझे किसी की परवाह नहीं है 
अलहदा हूँ सबसे अगर तो ये गुनाह नहीं है। 
साईं तो हैं यूँ हर किसी के भीतर मगर 
कहोगे अगर तो मुझे भी इंकार नहीं है। 
बात सीधी सरल है थोड़ी समझो अगर 
यूँ मुझे खुद की भी ज़रा परवाह नहीं है। 
रोशन तो हैं सितारे एक से एक बढ़कर मगर 
सूरज के आगे किसी की भी बिसात नहीं है। 
आस्ताने से जिसे मिलता हो उसका वरद हस्त 
सिर कहीं और उसे झुकाने की जरूरत नहीं है। 
तुम भी वही,हम भी वही मनो यूँ ही अगर
 फिर कहीं दिल लगाने की जरूरत नहीं है।  

Thursday, 3 March 2016

"नलिन" नाल जुडी है ब्रह्म से


"नलिन"नाल जुडी है ब्रह्म से 
या कहूँ तो ब्रह्म की नाल से 
जुड़ा प्रस्फुटित है "नलिन " ।   
तो भला सोचो जरा 
"नलिन" क्यों हो मलिन
 वह तो सदा निर्मल
 विहसता  ही रहेगा। 
जीवन के सतत प्रवाहमान 
बने रहने के लिए
 सत्यम,शिवम सुन्दरम की 
जाग्रत अनुभूति के लिए।
उसकी सहज मोहक,सरल चितवन 
भर देगी हर किसी के अंतर्मन में
एक अद्भुत शान्ति 
करुणा,प्रेम,सह्रदयता। 
हर घड़ी,हर पल 
जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में।   

Wednesday, 2 March 2016

प्यार का एक अज़ब दरिया


दौड़ कर चला आता है ,मददगार बन कर वो  ऐसे
खरीदा हुआ दास भी हो जाये शर्मिंदा खुद पर जैसे।
दिलों की हर बारीक धड़कनों पर नज़र है उसकी
सांसों की हर डोर पर सदा चलतींहै मर्ज़ी उसकी।
हर कदम पर साँस जब- जब लडखडाती है हमारी
पेशानी के पसीने को पोछता है वो आकर हमारी।
प्यार का एक अज़ब दरिया बहता है उसके दिल में
हम-सब को मिलता है हर-पल अमृत रस जिस में। 

Tuesday, 1 March 2016

साईं तेरी कृपा का



साईं तेरी कृपा का बोलो  कौन भला बखान करे 
ज़र्रे-ज़र्रे कृपा चरण का कैसे कोई बखान करे। 
इसमें-उसमें,मुझमें-सबमें,तू ही तो रहा करे 
कंठ-कंठ में यशगान का कैसे कोई बखान करे। 
जब तू हँसता,सब जन हँसते,जब तू रोता सब जन रोते 
तेरी इस अदा का या रब कैसे बखान  हम कर सकते। 
सब की मुश्किल का विष प्याला तुम हो गुपचुप पीते 
कष्ट,मुक्ति की रीत ही ऐसी,सबका दिल तू जीते। 

साईं- साईं नित नाम रटो


साईं- साईं नित नाम रटो ,ये ही जीवन सार 
जनम-जनम का पुण्य फल मिलता हे साकार। 
साईं नाम की महिमा अविगत,अकथ,अपार 
जो जापे इस नाम को,उसका हो उद्धार। 
एक भरोसो एक बल,एक आस विश्वास 
साईं में जब मन रमा तो पूरे सब प्रयास। 
मन,बुद्धि,विवेक,बल सब से लगे न कुछ हाथ 
जब तक साईं दरबार में झुके न तेरा माथ। 
साईं दिव्य कृपा हस्त से मिटता है  अज्ञान
 गूंगे के मुख भी होता वेद ऋचा का गान । 
प्रकृति के हर कण-कण में बसता साईं राम 
मात्र शुद्ध,सूक्ष्म भाव से दे दर्शन अभिराम। 
डोर जो अपनी सौंप सको तो,सौंप दो उसके हाथ 
वर्ना जीवन व्यर्थ जायेगा,लगे न कुछ भी हाथ।