पर इससे भी हल क्या कुछ होगा।।
जो रचा है विधान साईं ने अपने।
वह तो हमें हर हाल भोगना होगा।।
उसने भी तो मार करके मन अपना।
नियति से हार,कालदंड लिखा होगा।।
अब तो जो भी सम्मुख सच है आया।
उस सबको तो हमने सहना ही होगा।।
मन को अपने समझा-बुझा,जैस-तैसे।
हर हाल मिलकर हौसला रखना होगा।।
समय लेगा अवश्य कड़ी परीक्षा अपनी।
पर जीवन को तो हंसते हुए जीना होगा।।
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