Wednesday, 1 July 2026

६७४: ग़ज़ल

हजारों अरमान लिए लो हम आ तो गए दुनिया में।
किसे पता था ये किसी के पूरे नहीं हुए दुनिया में।।

पंख फड़फड़ाए यूं तो हजार बार पिंजरे में हमने।
मर कर ही मगर आजाद हो उड़ पाए दुनिया में।।

जाने किस तरह जीने का सलीका सिखा रहे हैं लोग।
ये अजीब रंग-ढंग हमें भला कहां भाए दुनिया में।।

ठान के आए थे इस बार तुझे अपना बना ही लेंगे। 
हर बार के जैसे पर कांच ही बटोर लिए दुनिया में।

आंखों में चमक थी,हौसला था कुछ कर दिखाने का।
हर दिल अज़ीज़ हो तभी तो "उस्ताद" छाए दुनिया में।।
 ।।नलिन उस्ताद।।