Monday, 30 July 2018

आखर-आखर

आखर*-आखर सब मोती हो गए।*शब्द
दिल से निकले तो सच्चे हो गए।।

देख जज्बा प्यार का सब के लिए।
हम तो बड़े मुरीद उनके हो गए।।

मंदिर-मस्जिद जाएं भला हम क्यों।
आईने में जब रूबरू हो गए।।

नजरों से हटा जब भेद तेरे-मेरे का।
फासले फिर अपने तो सारे दूर हो गए।।

हुआ उस गुलफाम* से जब इश्क हमारा। चर्चा में सारी दुनिया के हम हो गए ।।
*फूलों के समान रंग वाला

"उस्ताद"की आंख में दिखी दुनिया।
तब से हम उसके शागिदॆ हो गए।।

@नलिन #उस्ताद

Thursday, 26 July 2018

गजल-66 सजदा हो गया

उसकी चौखट पर जो कभी सजदा हो गया।
जिंदगी को जीना आसान अदा हो गया।।

कांटे मिलेंगे रास्ते में तो मिलते रहें।
मंजिलों से तो अपनी तजुरबा सदा हो गया।।

ज्यादा दूर की सोचें भला हम क्यों।
भरोसा जब खुदा पर कायदा हो गया।।

गिने किसी की कमी बिना देखे खुद को।
वो तो खुद में ही एक आपदा हो गया।।

चांद के चेहरे पर दाग है तो क्या हुआ।
है उजला दिल तभी तो वो अलहदा*हो गया।।
*विशिष्ट

आओ कमा लें कुछ सवाब*हम अपने लिए।*पुण्य
यूं कौन जाने चश्म**कब परदा हो गया।। ** आंखें

"उस्ताद" तुम भी कहां किस सोच में हो डूब गए।
सारा जहां ही जब तन्हा यदाकदा हो गया।।

सौभाग्य से

गुरु के दरबार में लगती है हाजिरी बड़े ही सौभाग्य से।
जनम-जनम की होती है सभी साध पूरी बड़े सौभाग्य से।
वो तो रग-रग को जाने,बिना कुछ बतलाए बड़े सौभाग्य से।
एक चुटकी बजाते हर मुश्किल को करता आसान बड़े सौभाग्य से।
ये पावन पर्व जो आज आया अपने जीवन में बड़े सौभाग्य से।
आओ सब करें गुरु स्तुति को मिल-जुल  गाकर बड़े सौभाग्य से।
यही कामना,यही आराधना करते रहें हम बड़े सौभाग्य से।
नित रति बढे हम सबकी श्री चरनन  गुरु के बड़े सौभाग्य से।
जीवन में शतदल खिले निर्मल "नलिन" बड़े सौभाग्य से।
बन मधुकर कृपा रस पी लें आओ हम सभी बड़े सौभाग्य से।

@नलिन #तारकेश

चैन होना चाहिए

कुछ हो ना हो भले पास हमारे चैन होना चाहिए।
यकीं ना हो चाहे खुदा पर खुद पर होना चाहिए।

दौलत,शोहरत होगी मिलनी तो मिल जाएगी। चस्का मगर तुझे ना पागलों सा होना चाहिए।

तकलीफ खड़ी हों रास्ता रोककर लाख हमारा।
मंजिल चूमने को अपनी जुनून होना चाहिए।। 

वो जो धूप,ठंडी,बरसात में जूझते हैं वतन की खातिर।
असल ऐसे जिंदगी के नायकों का इकराम* होना चाहिए।।*सम्मान

सपना सदा हर "उस्ताद" का  यही एक रहा है।
शागिर्द उस से बढ़कर दो हाथ होना चाहिए।।

@नलिन #उस्ताद

Wednesday, 25 July 2018

बहे दरिया लबालब प्यार का।

आंखों में उसकी बहे दरिया लबालब प्यार का।
डूब के देखो तो सही गहरा कितना प्यार का।।

घर जो बसा लेता है सभी के दिलों में।
होता है उसके पास तो वीजा प्यार का।।

दिखती है ये कायनात सारी चटक शोख रंगों से सजी संवरी।
अभी देखा ही कहां हुजूर आपने जलवा-ए- फन प्यार का।।

देखते ही जो कभी लगता है बड़ा अपना। जन्मों से उस से होता है रिश्ता प्यार का।।

सूखा दरख्त जो खिल जाता है बहार में।
वो और कुछ नहीं बस कमाल है प्यार का।।

दिल-ए-अजीज जो अब हो गया "उस्ताद" सब का।
राज अगर सच बताऊं तो वो है प्यार का।।

@नलिन #उस्ताद

वो हमारी तो हम उनकी तारीफ करते रहे

वो हमारी तो हम उनकी तारीफ करते रहे।
यूं बसर अपनी जिंदगी खुशी-खुशी करते रहे।

रंजोगम का जोड़ा ना घौंसले में एक तिनका। बस एक दूजे से प्यार ही प्यार करते रहे।।

बात में दम तो है कि होता नहीं कोई किसी का।
जान कर भी अंजान हम इश्क सबसे करते रहे।।

पढ़ ही लेते हैं लोग मासूमियत हमारी।
सब हमसे इसलिए धोखाधड़ी करते रहे।।

देखा जो उसने हमें बड़े ही प्यार से।
बस थम जाएं ये वक्त तमन्ना करते रहे।।

जिस्म का रूप,रंग तो बदलता जाता उमर के साथ में।
सो "उस्ताद" हम रूह से रूह का रिश्ता करते रहे।

@नलिन #उस्ताद

Monday, 23 July 2018

किया करो

औरों से ना सही किया करो।
खुद से तो गुफ्तगू किया करो।।

जिस्म,लिबास क्यों आंकते भला।
उतर कर दिल में देख लिया करो।।

माना उसे नहीं है अदब का इल्म।
बढ़ के तुम ही हाथ मिला लिया करो।।

आंखों में सपने हैं उस गरीब  के भी।
हो सके तो तुम भी मदद कर दिया करो।।

धन-दौलत ही से नेकी हो ऐसा तो नहीं।
कभी दो बोल मीठे दिल से बोल दिया करो।।

जमाने का क्या है वो तो कहेगा ही।
दिल की "उस्ताद" तुम अपनी किया करो।।

@नलिन #उस्ताद