Wednesday, 28 February 2018

उनसे जब नैन लगे मेरे

देह मन महकने लगे मेरे ।
उनसे जब नैन लगे मेरे।।

प्रीत का रंग कुछ ऐसा बहा।
पंख फड़फड़ाने लगे मेरे।।

दूरियों की मुश्किलें कहां गिनीं।
हौसले नभ चूमने लगे मेरे।।

मिलेंगे कभी तो क्या कहूंगा।
सोच यही पड़ने लगे मेरे।।

हर तरफ उनके नाम की धूम है।
साथ तभी भाव बढ़ने लगे मेरे।।

तुम भी रहो "उस्ताद" राम के भरोसे।
काम होंगे जैसे होने लगे मेरे।।

@नलिन #उस्ताद

Tuesday, 27 February 2018

कस्तूरी का सैलाब

कस्तूरी का सैलाब उसके भीतर बह रहा था।
मगर बांवला सा वो सूखा भटक रहा था।।

जूही,चम्पा,चमेली सुगबुगा रहीं कुछ ।
रस तो भ्रमर पर गुपचुप ही पी रहा था।।

फागुनी बयार का नशा ऐसा चढ़ा।
जड़,चेतन जगत सब बौरा रहा था।।

आंखों में सुरमई लाल डोरी खींच गई।
बहकते पांव कहां कुछ होश रहा था।।

सौंधी सी माटी का ऑचल मिला तो।
होने को अंकुरित बीज मचल रहा था।

कान में चूॅ चूॅ सुनने की खातिर।
पंछी भी तिनके बटोर रहा था।।

"उस्ताद" तो झरोखे राम के बैठ कर। 
उसके रंगों की माया निहार रहा था।।

@नलिन #तारकेश

गजल-68:मैखाना पी लो

सबको मुबारक हो बहुत नया साल
ॐ卐☪✝☆¤▪ॐ卐☪✝☆▪

जश्न है नए साल का मनाना पी लो।
मिला जो आज अच्छा बहाना पी लो।।

पीना यूं चाहो तो मैखाना पी लो।
नहीं तो एक घूंट बन दीवाना पी लो।।

ये दुनिया भी हंसी है अगर कहो तो।
जो बस सलीका-ए-आशिकाना पी लो।।

ढलकती है आंखों से भी एक मय।
कटेगा सफर ये सुहाना पी लो।।

खुदा की इनायत है हर वक्त बरसती।
खोल मन की आंखे तुम जमाना पी लो।।

मिलेगी बहुत कामयाबी इस जहां में।
गमों का जो तुम कभी पैमाना पी लो।।

चखी"उस्ताद"ने उमर भर ये नायाब  हाला।
जो मस्ती में चाहो संग लड़खड़ाना पी लो।।

@नलिन #उस्ताद

Sunday, 25 February 2018

रंग भरी एकादशी

रंगों भरी एकादशी झूम कर आ गई।
लो प्रकृति पुरुष को लुभाने आ गई।।

इंद्रधनुषी रंगों की अनोखी छटा से।
मुबारक हो होली पुकार आ गई।।

लिये हाथ पिचकारी बाल गोपाल सभी। झूमती खिलखिलाती टोलियाॅ आ गई।।

हर तरफ अनोखा एक समाॅ बंध गया।मदमस्त पांव में घुंघरू की थाप आ गई।।

बनी हर गली वृंदावन धाम जो।
आंखन छवि युगल सरकार आ गई।।

है रंगीन मिजाज कुछ हमारा कुमाॅऊ। 
पूष इतवार से तभी होली आ गई।।

अबीर गुलाल मल बोज्यू* के गालन।*भाभी
लल्ला की आंखन चमक आ गई।

हर कोई रंग के नशे में चूर दिख रहा।
बिन पिए "उस्ताद"हमें तो झूम आ गई।।

@ नलिन #उस्ताद

बस प्यार से

कटेगा सफर ये जिंदगी का बस प्यार से।
तुम मुझे मैं तुम्हें सराहूं बस प्यार से।।

रास्ते कठिन हैं प्रश्न भी ढेर सारे।
पाएंगे मंजिल तो हम बस प्यार से।।

वो करता है नफरत यदि तो करता रहे।
दिल में उतर जाऊंगा मैं बस प्यार से।।

दीवारें गिरा दो मजहब की सारी।
अब तो देखो सभी को बस प्यार से।।

अलहदा रंग है बड़ा इस प्यार का।
सतरंगा है जीवन बस प्यार से।।

कहो कैसा गुस्सा कहां कोई झगड़ा।
आओ मिलकर रहे हम बस प्यार से।।

"उस्ताद"कसम है तुम्हें प्यार की।
होंगी अब तो बातें बस प्यार से।।

@नलिन #उस्ताद

Saturday, 24 February 2018

कभी तो तुम हंस लिया करो

कभी तो तुम हंस लिया करो।
नैना खिला भी लिया करो।।

दूर की ही सोचती हो हरदम।
पास  मैं भी कभी जी लिया करो।।

खुशियां बाहर नहीं भीतर मिलेंगी।
एक बार अच्छे से ढूंढ लिया करो।।

मां-बाप की बात कुछ तो खास है।
उनकी भी सुन कर देख लिया करो।।

पेड़-पौधे,हवा,कायनात सारी।
कुछ धड़कन इनकी भी सुन लिया करो।।

जो आ पहुंचे हो महफ़िल में तो।
थोड़ी-थोड़ी तुम भी लिया करो।।

"उस्ताद" बने बात तभी सब।
चरण-शरण गुरु जब लिया करो।।

@नलिन #उस्ताद

Friday, 23 February 2018

पकड़ के मेरा हाथ उसने बीच भंवर छोड़ दिया

पकड़ के मेरा हाथ उसने बीच भंवर छोड़ दिया।
वो ही सहारा एक था पर बेसहारा छोड़ दिया।।

बहुत पी ली मय अब और कितनी पी लें भला। 
दिखाना असर अपना नशे ने भी छोड़ दिया।।

मंदिर,मस्जिद,चचॆ जाते भला क्यों हम कहो।
खुदा ने भी जब से साथ अपना छोड़ दिया।।

रास्ते अलग-अलग भटकाते हैं अपनी तरह से।
अब तो ये देख हमने घर से निकलना छोड़ दिया।

इतनी अकड़, गुरूर और शोखी कहो किस बात की।
इंसान हो कर भला क्यों इंसानियत को छोड़ दिया।।

हर तरफ रहा अहले करम उसका बिखरा हुआ।
जाने क्यों भला सजदे में झुकना छोड़ दिया।।

अपने में मगरूर हो और पर इल्जाम ठोकता रहा।
नतीजा ये हुआ हर किसी ने तन्हा उसको छोड़ दिया।।

प्यार,दोस्ती,नेकी किस युग की जाने बात रही।
अब किसी से "उस्ताद" हमने बोलना ही छोड़ दिया।।

@नलिन #उस्ताद