Wednesday, 27 July 2016

मोबाइल दोहे


 मोबाइल का प्रचलन बढ़ा,जबसे चारों ओर
सुबह-शाम बस बातों में,रहता सबका जोर।
बैटरी ख़त्म को हो होती,प्राण कंठ को आते
मिल जाए खाली सॉकेट,चेहरे हैं खिल जाते।
कहना ना कहना सब,जोर-जोर चिल्लाना
मोटरसायकल,कार चलाते भाता बड़ा बतियाना।
अब जब से स्मार्टफोन,घर-घर है जा पहुंचा
फेसबुक,ट्विटर ही लगता,सबको अपना बच्चा।
सुबह-सवेरे उठ कर पहले,व्हाट्स ऍप खंगालना
तब कहीं जा के काम जरूरी,और अन्य निपटाना।
मेरी सेल्फी जैसे भी हो सबसे बस नायाब रहे
यही सोच सूली चढ़ने,हर कोई अब तैयार रहे।
फ़्रॉड भी इनसे होने लगे,अब तो बेहिसाब
फिर भी दिल भरता नहीं,इनसे जरा ज़नाब।
दरअसल इनके लाभ की चर्चा,हर एक ख़ासोआम
दुनिया पूरी मुठ्ठी में रहती,रुके ना कोई काम।

Monday, 25 July 2016

जय-जय महादेव प्रभू



  1.   जय-जय महादेव प्रभू 
  2. तुम आदि देव अनंत हो। 
  3. काल के भी महाकाल 
  4. तुम आशुतोष बड़े हो। 
  5. पंचतत्व देह के तुम 
  6. मंगल करण विधान हो। 
  7. हर पाप,अशुभ कर्म का 
  8. छरण करते तुरंत हो। 
  9. जय-जय महादेव प्रभू 
  10. शीघ्र कृपा आशीष दो। 
  11. रोग,शोक,मोह-काम से 
  12. हमें सदा को तार दो। 
  13. अपनी चरण रज भस्म से 
  14. भाल का तिलक कर दो। 
  15. हृदय विराजत बाल छवि 
  16. राम की हमें भेंट दो। 
  17. गुरुदेव हमारे आप ऐसे 
  18. शिव-भाव-विभोर करो। 

Thursday, 21 July 2016

भारत में खाते-पीते,नसें वतन की काट रहे


जिस शाखा में कूद-कूद कर उछल रहे
बौराए मर्कट उस शाखा को ही तोड़ रहे।
बुद्धिजीवी,सेक्युलर का हरदम छद्म वेष धरे
भारत में खाते-पीते,नसें वतन की काट रहे।
वोट-बैंक की खातिर नेता ये मंझे हुए
फसल घृणा-द्वेष की हैं समाज रोप रहे।
राष्ट्रप्रेम का नित मिथ्या नाटक रचते
सर से पाँव घोटालोँ में खूब सने रहे।
दुनिया थू-थू करती तो बला से किया करे
गद्दारों संग रस ले मुर्ग-मुस्सलम तोड़ रहे।
मुद्दे भटका,उल्लू अपना सीधा करते
जैसे-तैसे गठरी इनकी बस भरी रहे। 

Wednesday, 20 July 2016

कारे बदरा देखो झूम रहे गगन में





कारे बदरा देखो झूम रहे गगन में 
 सबके मन-मयूर नाच रहे धरती में। 
प्यासी धरती भी परम तृप्ति की आस में 
मुदित बटोरे रजत बूँद अपने आँचल में। 
मीन,मकर,जलचर सब अति आनंद में 
पशु,पंछी उल्लसित विचर रहे आकाश में। 
नौजवान भर रहे स्वप्न नए आगोश में 
वृद्ध झाँक रहे पुलकित भीतर अतीत में। 
बाल-वृन्द संतुष्ट कागज़ की नाव चलाने में 
कृषक व्यस्त हैं स्वर्णिम भविष्य बुआई में। 
साधक जीवन कृत-कृत्य चौमासे में 
हरी कृपा जब बरस रही उर आँगन में। 


Sunday, 17 July 2016

राम जी से विनती



तू तो है भाव का भूखा
मैं रसहीन शुष्क हूँ।
तू पर कातर कृपा पुंज
मैं स्वार्थ में निबद्ध हूँ।
सब हैं जब तेरे अपने
मैं खुद में क्यों निमग्न हूँ।
तू है जब भला भक्त सबका
मैं कहाँ कैसा भक्त हूँ।
हर साँस पर तेरा नियंत्रण
मैं कहाँ करता कुछ कर्म हूँ।
यूँ ही कृपा करते रहना सदा
मैं तो बस तेरा एक क़र्ज़ हूँ। 

राम जी से विनती



तू तो है भाव का भूखा
मैं रसहीन शुष्क हूँ।
तू पर कातर कृपा पुंज
मैं स्वार्थ में निबद्ध हूँ।
सब हैं जब तेरे अपने
मैं खुद में क्यों निमग्न हूँ।
तू है जब भला भक्त सबका
मैं कहाँ कैसा भक्त हूँ।
हर साँस पर तेरा नियंत्रण
मैं कहाँ करता कुछ कर्म हूँ।
यूँ ही कृपा करते रहना सदा
मैं तो बस तेरा एक क़र्ज़ हूँ। 

Saturday, 16 July 2016

IS ISLAM A TERROR ? Small hindi poem

इस्लाम क्यों कर दहशतगर्दों का दीने इलाही है बन रहा
मुफलिसी,बेरोज़गारी क्यों नहीं जेहाद का सवाल बन रहा।
हरा तो रंग है हंसी-ख़ुशी ,विकास की बहार का
अज़ान को भला वो फिर रक्तरंजित क्यों कर रहा।
जब है मज़हब इस्लाम अमन, प्यार और वफा का
पेट दाढ़ी ,पैदल दिमाग क्यों बेवज़ह भाव दे रहा।
हाथ मासूम बन्दूक थमा विलायत खुद की औलाद भेज रहा
नामुराद रंगा सियार चुपचाप मुर्ग-मुसल्लम खुद तोड़ रहा।
 जमाना बुलंदियां सितारों की चूमने कदम-कदम मिला रहा
फिर क्यों हमारा एक हाथ ही फसल अंगार की रोप रहा।
इंसानियत कलप रही देख नन्हे- नन्हे फरिश्तों का शव
"उस्ताद " हैवान है तू कलेजा मुंह नहीं जो आ रहा।