Friday, 13 January 2023

मकर संक्रांत की बधाई

मकर में बढ़े जो सूर्यनारायण,उत्तरायण की पगडण्डियाँ। चारों दिशा उड़े देखो,कितना उल्लास-रस,मोरी मईय्या।। 

बिहू,पोंगल,घुघुती त्योहार या हो चाहे लोहड़ी की ता-ता थैय्या। 
तिल,गुड़ की मिठास तो लेती जोर चटखारे जुबान मोरे भैय्या।।

अवध में रघुनंदन जी उड़ावें पतंग,मां सीता दे रहीं छोड़िय्या।
वहीं बरसाने राधा ने काट दी पतंग,रह गई ताकते कन्हैया।। 

मधुमास की आहट सुन,प्रेमी जन झूमते,ले हाथों में बईयां।।
"नलिन" उर-सरोवर,खिले अकूत,मगन हो गा रहे सब गवैया।।

नलिनतारकेश

503:ग़ज़ल: सजदे की चौखट

आलिम-फाजिल बनने की दौड़ में जरा कम रहिए। 
कभी बनकर जाहिल खुद को भी भुलाया कीजिए।।

दुनिया रंग-बिरंगी लगती है बड़ी प्यारी यकीनन।
नकली चश्मा उतार हुजूर रूहे नजर भी देखिए।।

जाम औ साकी का दौर तो चलेगा हरेक रात यूँ ही।
सुबह उठ जाएं तो कभी खुर्शीद से नजरें मिलाइए।।

यकीं मानिए फ़ना तो होना है बुलबुले जो ठहरे।
ख़्वाबों में देखना ख़्वाब शेखजी मुल्तवी करिए।।

दीवानापन बना रहे "उस्ताद" कसम से आपका।
मगर अच्छा हो सजदे की चौखट बदल दीजिए।।

नलिनतारकेश@उस्ताद

Thursday, 5 January 2023

राधा कृष्ण

अरुण "नलिन" अधर कृष्ण ने जब मधुर वेणु तान छेड़ी। दौड़ती-भागती आंचल फैलाए राधा सन्मुख हो गई खड़ी।।

अप्रतिम प्रेम सुधा-रस फिर तो क्या था बरसता रहा।
ब्रम्हांड के पोर-पोर नवल कौतुक की लग गई झड़ी।।

कजरारे चितवन आमने-सामने गुत्थम-गुत्था लड़ने लगे। बांवरी वृषभानसुता मनमोहन पर मगर अति भारी पड़ी।।

हास-परिहास,नोकझोंक का ये सिलसिला जो चला। 
कौन जाने कब तक ,जब थम गई काल की ही घड़ी।।

नलिनतारकेश

Tuesday, 3 January 2023

502:ग़ज़ल

502:

मोटी कोहरे से भरी रजाई ले खुर्शीद* है सो गया।*सूर्य 
कमबख्त उठता ही नहीं जाने क्या इसे हो गया।। 

यूँ सर्द मौसम है थोड़ी बहुत तो चलती ही है मगर।
शायद कल रात कुछ ज्यादा ही चढ़ाकर खो गया।।

आपसी रिश्तो में जब भी तीसरे को शामिल किया।
देखो वो आकर हमारे बीच फूट के बीज बो गया।।

झिड़कियों,नसीहतों,उलाहनों से उफन रहा था।
जो हमदर्द बन गले लगा लिया मैंने तो रो गया।।

बताते थे "उस्ताद" तुम बहुत बड़ा ज़हीन खुद को।
लो आज अदना सा शागिर्द ठाठ से रील धो गया।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

501:ग़ज़ल अब तो

501

किसी और की जरूरत नहीं रहती यारा अब तो।
खुद से ही हूँ हजामत अपनी बना लेता अब तो।।

तारीखें जो बदल जाती हैं खुद से उनको बदलकर।
सोचता हूँ यही अक्सर हो गया मैं मसीहा अब तो।।

जबसे खुद को एक दूरी बना जांचने की सोची है।
कसम से सौ नुस्ख खुद में ही दिखने लगा अब तो।।

वही चेहरा हर रोज जाने क्यों मुझे दिखाता है आईना।
तंग इससे आ गया हूँ सो बदलना तो पड़ेगा अब तो।।

दिन में तो मसरूफियत सबको ही रहती है मगर।
"उस्ताद" रातों में भी कौन है भला सोता अब तो।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Monday, 2 January 2023

卐ग़ज़ल:500 :पंच शतक ग़ज़लों का सफर पूरा हुआ 卐

जो भी सुनिए जो भी कहिए सब रब का नाम है।
बस इस बात को महसूस करना अपना काम है।।

कतरे-कतरे हर शै में वही ख़ामोशी से है छुपा।
ढूंढे जो शिद्दत से कोई तो वही उसका धाम है।।

आजकल सस्ते-मद्दे का जमाना ही कहाँ रहा जनाब।
बिकता है वो सब कुछ जिसका ऊंचे से ऊंचा दाम है।।

थककर उड़ते परिन्दे अब अपने घरों को हैं जाने लगे।
चल लौट के आजा मुसाफ़िर तेरी भी उम्र की शाम है।।

नशा तो यूँ बहुत है दुनियावी रानाइयों* में "उस्ताद"माना।*सौन्दर्य 
निगाहों से मगर कभी पीकर तो देख कैसा उसका जाम है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Sunday, 1 January 2023

499:ग़ज़ल: तेरा नाम न भूलने की

तेरी आँखों में आज शरारत कुछ तो है। 
ये ओढ़ी हुई गजब शराफत कुछ तो है।।

अब ज्यादा क्या कहें सब तो हैं जानते।
खबरें यही बतातीं कयामत कुछ तो है।।

प्यार का इजहार उसने सरेआम किया।
इसमें कहो कहाँ भला गलत कुछ तो है।।

वो मुझे भुला कर अब हिचकियाँ दे रहा।
देर ही में सही उसमें नदामत* कुछ तो है।।*पश्चाताप 

न गले ही लगाया मुझे न बात करी कुछ भी।
मगर फेरी नहीं पीठ सो रवायत* कुछ तो है।।*परम्परा

यूँ तो याद आता नहीं "उस्ताद" कुछ भी वक्त पर।
पर चल ये तेरा नाम न भूलने की आदत कुछ तो है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद