Monday, 4 September 2023

575: ग़ज़ल:उस्ताद जी डूब जाते हैं

महकते हैं फूल तो उनके साथ कांटे भी होते हैं।
इश्क करते हैं जब तो क्यों नहीं हम ये सोचते हैं।।

चांद रुपहला,संगमरमरी दिख रहा हो कितना भी चाहे। हकीकत में धीरे-धीरे ही सही ओझल तो होगा जानते हैं।। 

जो बदलोगे नहीं फितरत तो क्या सब ठहर जाएगा।
वक्त के कदम कहाँ किसी के भी रोकने से ठहरते हैं।।

दूर कहीं अंधेरी सुरंग से दिख रहा है टिमटिमाता दिया।
चलो काफी है सुकूं इतना आगे बढ़कर सफर करते हैं।।

ये जिंदगी की नाव को खेना आसान कहाँ है।
साहिल पे आकर भी "उस्ताद" जी डूब जाते हैं।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Sunday, 3 September 2023

574 : ग़ज़ल: धुआं धुआं सी

देखो तो यहाँ ना तुम हो ना हम हैं।
मगर फिर भी ना जाने क्यों गम हैं।।

ये कैसी बस्ती बसाई खुदा ने कहो तो।
ख्वाब,हकीकत सभी तो यहाँ भरम हैं।।

हर कोई तो घाव छूकर बस झंझोड़ता।
भला कहाँ लगाते यहाँ कोई मरहम हैं।।

किस पर करें यकीं इस सफर में हम।
बदलते सबके ही मिजाज़े मौसम हैं।।

धुआं-धुआं सी देख बिखरती जिंदगी।
गम भुलाने पीते "उस्ताद" चिलम हैं।।

नलिनतारकेश@उस्ताद

Saturday, 2 September 2023

573: ग़ज़ल: हवस हो गई है

हवस हो गई है केवल देह,दौलत,शोहरत की।
आरामतलबी है छाई कौन सोचे मेहनत की।।

अकेला चना भाड़ भी फोड़ लेगा चलो माना हमने।
महफिल सजेगी सुरमई जो बही बयार संगत की।।

चल पड़ा है सबको मोहब्बत की राह दिखाने के लिए।
नफ़रत के शहर में दाद तो देनी ही पड़ेगी हिम्मत की।।

ख्वाब देखना है जरूरी मुस्तकबिल संवारने को।
हाथ रखना मगर नब्ज़ पर ज़मीनी हकीकत की।।

क्या-क्या कहें,क्या-क्या लिखें,उनके जलवे दीदार पर। "उस्ताद"बस लेते बलैया उनकी नजाकत,नफासत की।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Friday, 1 September 2023

572: ग़ज़ल: चिंगारी अभी बाकी है

निगाहों में कशिश की चिंगारी अभी बाकी है।
सो दिल में धड़कती आशिकी अभी बाकी है।।

उम्र हो रही है तो वो बस जमाने के लिए है। 
प्यास पर भौंरे सी यूँ रसीली अभी बाकी है।।

किताबें पढ़ के तो देख लीं हैं बहुत हमने यारब।
हसरत मगर दिलों को पढ़ने की अभी बाकी है।।

शराब,साकी,जाम,मयखाने में सभी तो हैं मौजूद।
निगाह उसके दीदार को अखरती अभी बाकी है।।

कुछ कहेंगे "उस्ताद" इसको मृगतृष्णा तुम्हारी।
मगर खोज को कुलांचे तो नयी अभी बाकी हैं।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Wednesday, 30 August 2023

571: ग़ज़ल:दिल अपना नगर उदयपुर

है बहुत खूबसूरत हंसी ये झीलों का नगर उदयपुर।
हम जो गए तो लुटा बैठे दिल अपना नगर उदयपुर।।

एकलिंगी महादेव शिव ही हैं यहाँ के राजा नगर उदयपुर। जिनके आदेश बगैर नहीं हिलता एक पत्ता नगर उदयपुर।

श्रीनाथजी की महिमा नहीं जानता भला कौन कहिए।
देश-विदेश का मुसाफिर भागा है आता नगर उदयपुर।।

कहीं शहर में पुराने गलियाँ भी हैं संकरी कुछ तंग सी।  मगर हर आदम दिल से है दिलदार बड़ा नगर उदयपुर।।

दाल-बाटी-चूरमा,सांगड़ी,गट्टे-पापड़ साग,दिलजानी का स्वाद।

जुबां पे चढ़ा इनका जादू लजीज इतना ज्यादा नगर उदयपुर।।

सिटी पैलेस,सज्जनगढ़,सहेली की बाड़ी,जगदीशजी मंदिर।

बहुत देखा,मगर चार दिन देखते कैसे नगर पूरा उदयपुर।

कुदरत मेहरबान है सो दिल अजीज बड़ा है चप्पा-चप्पा यहाँ।
"उस्ताद" तबीयत भरी नहीं सो आने का वादा रहा नगर उदयपुर।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

 

Friday, 25 August 2023

570: ग़ज़ल:

चल दिए हैं लो हम सफर पर उससे मिलने।
जज्बात जोश मार रहे दिल में हजार हमारे।।

मौसम जो था कल तक रूखा बड़ा बेजान सा।
बदलकर हुआ कितना सुहाना बस एक दिन में।।

काले बादलों से घिरा हुआ है ये आसमां सारा।
होनी तय है बरसात जब उसको लगायेंगे गले।।

हरे-भरे दरख़्त सौंधी-सौंधी सी महक मिट्टी की।
कुदरत भी हमारे साथ बड़ी खुशगवार है दिखे।।

"उस्ताद" क्या खबर थी खैरमकदम यूँ होगा हमारा।
खड़े होंगे लोग हुजूम में हमें देने रंगबिरंगे गुलदस्ते।।

नलिनतारकेश @उस्ताद
नोट : रेल का नाम भी हमसफर है🤩

Wednesday, 23 August 2023

569: ग़ज़ल: चन्द्रयान की सफलता हेतु दुआ

बहुत बहुत बधाई के साथ सभी देशवासियों को
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दूरीयां कितनी भी बड़ी हों,कभी भी बड़ी नहीं होती।
मिट जाते हैं सारे फासले,हो मगर मोहब्बत सच्ची।।

मेरे महबूब तुझसे मिलने की बेकरारी है इतनी जा बढ़ी।
रकीब आ गले लगाए उससे पहले मैंने नकाब उठा दी।।

चांद मेरे हमनशीं,मेरे हमदम,तुझसे कहाँ कुछ भी छुपा।
मुझे कभी तेरी ये,नफासत भरी पर्दादारी भली न लगी।।

राज क्या है जो इतना करीब आकर भी ओझल हो जाए। दूसरों से भला क्यों सुनूं,अपनी जुबानी तू बात तो सही।। 

"उस्ताद" ये आंख-मिचौली,अब तो बंद कर दे खुदा के वास्ते।
बेइंतिहा मोहब्बत को न ठुकरा इस बार,तुझे कसम है मेरी।।

नलिनतारकेश @उस्ताद