Friday, 24 February 2017

डिमिक - डिमिक डम डमरू बाजे #adiyogi




डिमिक - डिमिक डम डमरू बाजे 
भोला मस्त मगन हो नाचे। 
'नलिन' नैन, बाधाम्बर धारे 
वाम उमा भी हर्षित छाजे। 
जटा जूट में गंग विराजे 
और मस्तक चंद्र सुहाए। 
हाथ त्रिशूल, नाग गले में डाले 
पांव में घुंघरू छन - छन बाजे। 
भूत - पिशाच मिलकर न्यारे 
भांग का गोला भर - भर खाते। 
बम - बम भोले, बम - बम भोले 
मिलजुल कर सब गाते जाते। 
"महाकाल" का जशन मनाते 
सुर, नर, मुनि उल्लास दिखाते। 
बेर, धतूरा प्रसाद चढाके 
शिव संग नित हैं मोद मनाते। 
हिम - कैलाश शिव शंकर प्रगटे 
सृष्टि रहस्य अनावृत करने। 

Thursday, 23 February 2017

जय बम-बम भोले बाबा





जय बम-बम भोले बाबा 
तेरे वाम विराजे माता अम्बा 
नाम का तेरे पी कर प्याला 
हो गया जग मतवाला। 

प्रभु तू जो बन जाये दाता 
रहूँ कृपा-प्रसाद पाता 
हँसते गाते जीवन मेरा 
है तूने सदा संवारा। 

प्रथम पूज्य है सूत तेरा 
वो धीर-बुद्धि में न्यारा 
रिद्धि-सिद्धि ने चॅवर झुलाया 
जिसने गणपति को ध्याया। 

श्री राम को तूने इष्ट बनाया 
बजरंगी बन सेवा को आया 
दुर्गम काज सब सरल बनाया 
रामभक्त का दर्जा पाया। 









Wednesday, 28 December 2016

शिवांश हैं हम जन सभी


शिवांश हैं हम जन सभी 
उस दिव्य परम पुरुष के। 
अतः हम क्यों सोचें कभी 
योग्य नहीं परम सत्य के। 
छिति,जल,पावक,गगन,समीर 
पंचभूत रचित हुई हमारी रचना।
जो सब उसकी ही तूलिका से 
है विलक्षण रची एक योजना।
आत्म तत्व तो उसी का है हममें 
चेतना का तेजोमय आलोक भरता। 
वही जब समाहित होता उसमें 
तो जगत है उसको मृत्यु कहता। 
पर वो तो है दिव्य मिलन
आत्मा और परमात्मा का।
अतिथि बन,कुछ देर घूम-टहल 
वापस अपने मूल निवास जाने का। 
अतः इस यात्रा को क्यों हम ढोयें भला 
परमोत्सव की तरह क्यों न चलते रहें।
जो भी है उसकी योजना हमारे प्रति 
आओ उस सोच को बस पूरा करतें रहें। 

Monday, 26 December 2016

गजल-52 "उस्ताद" वो नेमत ही है, माना कीजिये



बढ़ती उम्र से न कभी परेशां हुआ कीजिये।
अपने दिल को बस बच्चा ही रखा कीजिये।।

आवाज में दर्द होता हो तो हुआ करे आपके।
फुरसत निकाल कुछ गुनगुनाया कीजिये।।

ये दुनिया तो मतलबी रही है सदा से यूँ ही।
भाव उसको न ज़्यादा कभी दिया कीजिये।।

रास्ते कठिन हैं डगर के हर कदम दर कदम
हर सांस बस खुद पर यकीं किया कीजिये।।

बदलते हैं घूरे के दिन भी कभी न कभी तो।
खुदा पर भी थोड़ा ऐतबार किया कीजिये।।

जो हुआ,हो रहा या जो होगा आगे कभी।
"उस्ताद" वो नेमत है,सुन लिया कीजिये।।  

Friday, 28 October 2016

तुम्हारे इसी जज्बे से महफ़हूज हमारी हर होली-दीवाली (सैनिकों को समर्पित )




तन-मन धन से बेपरवाह देश  की करते हो तुम रखवाली। 
तुम्हारे इसी जज्बे से महफ़हूज हमारी हर होली-दीवाली।।
खुद के घर मने या न मने ईद या नानक जयंती। 
तुमने तो कसम खाई शत्रु मुक्त रहे देश की धरती।।
जाड़ा,गर्मी,बरसात या हो विपदाएं असंख्य,अनोखी। 
रहा तुम्हारा सदा ही एक लक्ष्य,राष्ट्र रहे सदा सुखी।।
माँ-बाप,भाई-बहन,पत्नी सुख की दी तुमने कुर्बानी।
हम सब चिर ऋणी तुम्हारे,ओ भारत वीर सेनानी।।

Sunday, 2 October 2016

राम नाम अनमोल मन्त्र है



राम नाम अनमोल मन्त्र है 
सरल-सहज आसान जाप है 
पर मुख से जो न निकले तो 
मानव जन्म धिक्कार बड़ा है। 

भाव-कुभाव सतत जपना है 
जीवन अपना सफल करना है 
वरना शत आयु रही भी तो 
यूँ ही आना-जाना लगा रहना है। 

निर्मल करता राम नाम है 
तन-मन का उद्धार काम है 
सोच-विचार बहुत क्या करना 
जग का मूल राम नाम है। 

राम-राम कह सबसे मिलना है 
राम-राम कह जग से जाना है 
राम तत्व की महिमा जानी तो 
राम स्वरुप ही हो जाना है। 

Friday, 30 September 2016

नवरात्रि की इस शुभ बेला पर झूम उठी ये सृष्टि सारी

नवरात्रि की इस शुभ बेला पर झूम उठी ये सृष्टि सारी 
माँ शारदा,लक्ष्मी,काली की गूँज उठी देखो किलकारी। 
सत,रज,तम और वात,पित्त,कफ के सन्तुलन की है तैयारी 
नव-दिन में तन-मन साधन की,साधक में होती है बेकरारी।
नवदुर्गा के नवरूप मनोहर,नवधा भक्ति की है बलिहारी 
अंबे-अंबे पार लगा इस भवसागर से,ये भाव बहे संचारी। 
तंत्र-मन्त्र,यज्ञ-दान और कहीं जगराते की होती है तैयारी 
माँ तो है करुणा की देवी,एक पुकार सबकी लाज संवारी।
श्री,समृद्धि,शक्ति,शांति की ,घर-घर बहे बयार हितकारी 
निश्छल नतमस्तक हों देवी के आगे तो मिटें कामना सारी।