Saturday, 11 December 2021

महिमा राम नाम की

महिमा राम नाम की
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जिन्दगी कृपा संग संवरने लगी। 
राम नाम महिमा पता जो लगी।।
 
श्रृंगार की जरूरत अब नहीं रही।
जबसे लौ राम जी की लगने लगी।।

हर घड़ी हर सांस बस रटन ये लगी।
राम-राम जपते ही उम्र कटने लगी।।

जिधर देखूं बस वो ही मूरत न्यारी दिखी।
नलिन-नील सांवली छटा ही दिखने लगी।।

 दर्द,पीड़ा की बयार अब थम सारी गई।
 हर दिशा बस हवा अनुकूल बहने लगी।।

स्वपन नहीं हकीकत की ये बात है सही।
मंझधार मेरी ये नाव भी पार लगने लगी।।

@नलिनतारकेश

Wednesday, 8 December 2021

विनम्र श्रद्धांजलि -विपिन रावत एवं अन्य सभी को।

तमिलनाडु में सेना के हेलिकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण भारत के प्रथम CDS जनरल बिपिन रावत जी व उनकी धर्मपत्नी एवं सेना के जवानों के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। उनका असामयिक निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दे।
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                          ॐ शांति 

निःशब्द है राष्ट्र का आज हृदय प्रत्येक।
भावना का सिन्धु ज्वार उमड़ रहा है।।
8 दिसंबर 21 का लोमहर्षक चित्कार। 
दावानल में सब को भस्म कर रहा है।। 
अरे दुर्भाग्य बता तो सही जरा हमारे।
ऐसा भला क्यों क्रूर मजाक करता है।।
अतुल शौर्य,अटूट निष्ठा राष्ट्रभक्ति की।
इतनी कठोर तू काहे परीक्षा लेता है।।
हे ईश्वर तुझसे भी है प्रश्न,अब सत्य बता दे।
दुर्दांत घटना की ऐसी क्यों स्वीकृति देता है???

@नलिनतारकेश

Tuesday, 7 December 2021

गजल-404 : रखो गुलों से ताल्लुक

संग कांटों के खुद ही लहूलुहान होगे।
रखो गुलों से ताल्लुक महक जाओगे।।
वह चाहता जो तुम्हें आता जरूर मिलने। 
यूँ चाहत में सिसकियां कब तलक भरोगे।।
गुलशन,पहाड़,झरने बहुत कुछ है खूबसूरत यहाँ।
देखोगे तुम तभी मगर यार जब नजरिया बदलोगे।।
मिला है जो उसी में तसल्ली रखना सीखो। 
यूँ तो वर्ना तुम हर कदम ही भटकते रहोगे।।
समझे "उस्ताद" अगर जो बेज़ुबां का दर्द। 
निगाहें चार तुम परवरदिगार से कर पाओगे।।

@नलिनतारकेश

Monday, 6 December 2021

गजल: 403- पूरा डेंचर बदलते



किया है इकरारे इश्क जब से ख्वाबों में उसने।
होकर आवारा फकीर सा उसे ढूंढता हूँ तबसे।।

वो रूठता भी है तो बड़ी पाकीज़गी से मुझसे।
यारों का होता ही है लहजा मुख्तलिफ* सबसे।।*अलग सा

सदा से मुतमईन* रहा हूँ उसकी बांकी अदा पर।*निश्चिंत 
निकलेगा मेरा भी दूधिया चांद बादलों को चीरते।।

हर घड़ी,हर शै करता हूँ दीदार बस उसका।  
रंग गहरा चढ़ा है मुझे आशिकी का जबसे।।
 
हैरान हों वो जिनके इश्क में अभी दूधिया दांत टूटे।  
"उस्ताद" हम तो सुकूं से हैं पूरा डेंचर बदलते।।

@नलिनतारकेश 

गजल:402 - मंझे उस्ताद भी--

ना सही जाम,चाय की चुस्कियां ही लीजिए।
कभी साथ बैठ हमारे गुफ़्तगू भी कीजिए।।

वक्त की बेड़ियों में यूँ तो आवाज नहीं होती। 
थोड़ा ही सही मगर दर्द अपना बयां करिए।।

महफिलें तो चलती हैं हवाओं के बहने से।
झरोखों को अपने जरा खुला तो छोड़िए।।

माना है दुनिया में रंज,तकलीफ ही चारों तरफ।
चेहरा आफताबे* रुख भी तो करके जरा देखिए।।*सूर्य 

मंझे "उस्ताद" भी यूँ तो भँवर में डूब जाते हैं।
किनारों में खड़े क्यों भला फिर सिसकियाँ भरिए।।

@नलिनतारकेश

Saturday, 4 December 2021

ग़ज़ल-401- कुर्बान करी है।

जबसे तुझ संग इश्क की बान* लगी है।*आदत
खुद को अपनी एक पहचान मिली है।।

रेशा-रेशा मन ये बिखर गया था।
ऊँची अब जाकर उड़ान भरी है।।

बहके सुर सब सधे दर पर आज तेरे।
इनायते करम खालिस तान लगी है।। 

दिल की गली अब कोई जंचता ही नहीं। 
बगैर तेरे ये तो कब से सुनसान पड़ी है।।

रहा "उस्ताद" कहाँ कुछ भी मेरा अपना।
चाहत थीं जो सारी तुझपे कुर्बान करी है।।

@नलिन तारकेश

Friday, 3 December 2021

गजल: 400-वजूद अब तेरा पैवस्त हो गया है

गजल संख्या : 400
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ऐसा क्या हमसे गुनाह हुआ है।
तूने जो हमसे किनारा किया है।।
चाहने की कसमें तो बहुत खाईं थी तूने।
बता फिर भला क्यों ऐसा सिला दिया है।। 
सदाएं* सुनने को तेरी तरसते हैं अब तो। *आवाज 
वक्त ने जाने ये कब का बदला लिया है।।
अज़िय्यत* तुझे क्या पता जो हमें हो रही।*यातना
तूने मुस्कुरा के तो बस ना ही कहा है।।
तेरी रजा जो भी हो फैसला आखिर तेरा।
वजूद अब तेरा "उस्ताद" पैवस्त* हो गया है।।
*अंदर धंसकर अच्छे से बैठना।

@नलिन तारकेश