Wednesday, 13 July 2016

16 जुलाई 2016 कर्क संक्रांति के शिव-पार्वती विवाहोत्सव पर



16 जुलाई 2016 कर्क संक्रांति के शिव-पार्वती विवाहोत्सव पर 

भवानी-शंकर,प्रथम प्रकृति पुरुष हैं सकल सृष्टि में 
करुणानिधान मात-पिता सबके ही सम्बन्ध में। 
सौम्य दिनकर प्रवेश करते जब कर्क राशिचक्र में 
शिव बंधते शिवानी संग लीला हेतु परिणय सूत्र में। 
आषाढ़ माह के मेघ करते नृत्य प्रबल उल्लास में 
दामिनी दमकती वेग से नूपुर बन उनके पग में। 
मोर,पिंगल,दादुर सभी होते हर्ष अतिरेक में 
ताल-पोखर,नदी,जलाकर सब उमगते उफान में। 
श्रद्धा-विश्वास होता जब विवाह हृदयांगन में 
सृष्टि के रहस्य गूढ़ खुलते सभी प्रत्यक्ष में। 
शिवोहम का भाव लिए विचरते फिर संसार में 
माय के नागपाश से छूटते  तत्काल हम सहज में। 
भूत,प्रेत,पिशाच दुर्गुण सभी होते अपने वश में 
तारकेश दिव्य मन्त्र राम पाकर झूमते कैवल्य में। 

Tuesday, 12 July 2016

सावन के बादल उमड़ -घुमड़ इतनी करते


सावन के बादल उमड़ -घुमड़ इतनी करते 
मन-मयूर नाच उठता कदम हैं थिरकते। 
धरती का आंचल हर दिशा हरा-भरा कर देते।  
कृषक,साहुकार,जन-सामान्य फलते-फूलते। 
नदी,तालाब,सिंधु,पोखर सब उमगते 
जीव-जंतु खुशहाल विचरते दिखते। 
बाल-वृन्द,नौजवान वृद्ध सब विहसते 
अपनी-अपनी तरह से खूब आनंद लेते। 
प्रकृति के रंग क्या अदभुत नित सवंरते 
आकाश चित्रपट जब प्रभु तूलिका चलाते। 

Monday, 11 July 2016

सावन के बादलों की तरह हम भी


सावन के बादलों की तरह हम भी 
कहीं उमड़-घुमड़ बस बरस पड़ें। 
उत्तर,दक्षिण ,पूरब,पश्चिम कहीं भी 
आओ किसी दिशा हम निकल पड़ें। 
खेत,खलियानों,मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा 
जगह-जगह पर,मोड़-मोड़ पर बरस पड़ें। 
अमीर-गरीब,जात-पाँत से बंधन मुक्त 
गली,मुहल्लों के हर रस्ते गुजर पड़ें। 
काम करें कुछ ऐसा अपने जीवन में 
सुख,शांति स्वर हर आँगन में गूँज पड़ें। 

Friday, 8 July 2016

आतंक,वैमनस्य,दहशत,अंधेरगर्दी की फसल बोने वालों



आतंक,वैमनस्य,दहशत,अंधेरगर्दी की फसल बोने वालों 
हाथ कुछ भी न आयेगा इतना समझ लो समझने वालों। 
कब्र खोद रहे हो तुम ये खुद के लिए जरा समझ लो 
शरीयत से दुनिया चलने का ख्वाब पालने वालों। 
खुद की  दलदल में सिर तक धंस चुके हो जान लो 
हरा-हरा जो सूझ रहा तुम्हें जन्मांध आँख वालों। 
ज़रा भी ग़ैरत बची हो तुम में तो अब भी संभल लो 
प्यार,मोहब्बत भरी खुदा  की दुनिया में रहने वालों।
घर के न रहोगे घाट के ये बहुत ठीक से  जान लो  
हद से ऊपर जो बहने लगा है ज़ुल्म ढहाने वालों। 
हो सके तो तुम भी जल्द सौहार्द से रहना सीख लो 
रंग-बिरंगी दुनिया नेमत है खुदा को चाहने वालों। 
ख़ुदा  की ओर जाते हैं सभी रास्ते जान लो 
"उस्ताद" कुफ्र है बहुत ये न समझने वालों। 



Wednesday, 6 July 2016

तारूश्री एवं फ़राज़ को श्रद्धा-सुमन

कुरान की आयत का हर हर्फ़  रक्तरंजित हो गया 
अल्लाह जाने ये कौन सा अज़ब धर्म हो गया। 
दुनिया में जहाँ कहीं देखो बस यही चीख-पुकार 
अमन,प्यार, आशनाई का सरेआम क़त्ल हो गया। 
रमज़ान का पाक महीना ज़ालिमाना हो गया 
इबादतगाह में सज़दा भी अब तो हराम हो गया। 
फ़राज़ तेरे सिवा ये आशनाई कौन समझ सका 
जाते-जाते भी तू बेधर्मों को बेनकाब कर गया। 
यूँ तू हर बात-बेबात अक्सर फ़तवा जारी हो रहा 
आतंक के ख़िलाफ़ जुबां को मगर क्यों लकवा पड़ गया। 
कौन सावन का अन्धा भला हरा-हरा है देख पाता 
वज़ूद ही नहीं अगर "उस्ताद" तो ख़ाक जन्नत हो गया। 

Tuesday, 5 July 2016

साईं तुम्हारी कृपा दृष्टि का




साईं तुम्हारी कृपा दृष्टि का 
यदि मिलता नहीं सहारा। 
तो सोचो भला कैसे 
मृगतृष्णा भरे जीवन से 
मुझ जैसे मूढ़मति को 
मिलता कहाँ किनारा। 
मन में संशय ,बाहु-विकलता 
तिस पर लहरोँ का खौफ बड़ा। 
पर तुमने तो कृपा का बेड़ा 
मुझको हर बार दिलाया। 
मैं तो था बस आँखे मूंदा 
श्री चरणों में करके सज़दा। 
मेरी कुछ समझ न आया 
क्यों,कैसे ये हो पाया। 
धन्य-धन्य तुम तो साईं 
तेरी कृपा मैं पार न पाता। 
किस मुख से मैं करूँ प्रशंसा। 

Friday, 1 July 2016

गुरुवर तेरे "नलिन"चरण,



गुरुवर तेरे "नलिन"चरण,मुझको सदा लुभाते 
जैसे मधु पाने की खातिर भौरें,पुष्प-पुष्प मंडराते। 
गुरु रज पान बड़ा कठिन है माया जग में चलते 
लेकिन कृपा यदि हो जाए,पूरे सपने होते। 
तुझको पाने की चाहत,यदि हो गहरी हममें 
हर मुश्किल मिट जाएगी,दर्शन होंगे पल में। 
रोम-रोम पुलकेगा तेरा,फिर तो उसके आने से 
एक बार बुला के देख,"नलिन"उसे तू भाव से। 
हरी ओम तत् सत्