Wednesday, 2 March 2016

प्यार का एक अज़ब दरिया


दौड़ कर चला आता है ,मददगार बन कर वो  ऐसे
खरीदा हुआ दास भी हो जाये शर्मिंदा खुद पर जैसे।
दिलों की हर बारीक धड़कनों पर नज़र है उसकी
सांसों की हर डोर पर सदा चलतींहै मर्ज़ी उसकी।
हर कदम पर साँस जब- जब लडखडाती है हमारी
पेशानी के पसीने को पोछता है वो आकर हमारी।
प्यार का एक अज़ब दरिया बहता है उसके दिल में
हम-सब को मिलता है हर-पल अमृत रस जिस में। 

Tuesday, 1 March 2016

साईं तेरी कृपा का



साईं तेरी कृपा का बोलो  कौन भला बखान करे 
ज़र्रे-ज़र्रे कृपा चरण का कैसे कोई बखान करे। 
इसमें-उसमें,मुझमें-सबमें,तू ही तो रहा करे 
कंठ-कंठ में यशगान का कैसे कोई बखान करे। 
जब तू हँसता,सब जन हँसते,जब तू रोता सब जन रोते 
तेरी इस अदा का या रब कैसे बखान  हम कर सकते। 
सब की मुश्किल का विष प्याला तुम हो गुपचुप पीते 
कष्ट,मुक्ति की रीत ही ऐसी,सबका दिल तू जीते। 

साईं- साईं नित नाम रटो


साईं- साईं नित नाम रटो ,ये ही जीवन सार 
जनम-जनम का पुण्य फल मिलता हे साकार। 
साईं नाम की महिमा अविगत,अकथ,अपार 
जो जापे इस नाम को,उसका हो उद्धार। 
एक भरोसो एक बल,एक आस विश्वास 
साईं में जब मन रमा तो पूरे सब प्रयास। 
मन,बुद्धि,विवेक,बल सब से लगे न कुछ हाथ 
जब तक साईं दरबार में झुके न तेरा माथ। 
साईं दिव्य कृपा हस्त से मिटता है  अज्ञान
 गूंगे के मुख भी होता वेद ऋचा का गान । 
प्रकृति के हर कण-कण में बसता साईं राम 
मात्र शुद्ध,सूक्ष्म भाव से दे दर्शन अभिराम। 
डोर जो अपनी सौंप सको तो,सौंप दो उसके हाथ 
वर्ना जीवन व्यर्थ जायेगा,लगे न कुछ भी हाथ। 

Thursday, 25 February 2016

बंदरबांट

खैरात सूखाग्रस्त को बांटते हैं वो इस नाज़ोअन्दाज भरे हाथ
मानो खज़ाना लूटा रहे मेहनत्त भरा,जेब में अपनी डाल के हाथ।
बहुत बड़े नेता बन आपके, लूटते हैं आपको  हर बार
फिर खींचते हैं संग सेल्फ़ी आपका चूमते हुए हाथ।
ज़मीनी हकीकत से परचित नहीं,उड़ते जो हवा में आज
ज़ल्द ही देखेंगे वो अपनी गिरेबान में,कसते हुए हाथ।
चल रहा मौसम सारे जहाँ का बेढंगा,कोढ़ में जैसे खाज़
ये बचेंगे कहाँ जब लोग मिला लेंगे अपने  हाथ से हाथ।
चुपचाप सह  लेते हैं जो नियति समझ कर बंदरबांट
"उस्ताद" पिसते रहेंगे वो तो सदा ही बस  इनके हाथ।


Saturday, 20 February 2016

तिरंगे तू मेरे वतन की आन-बान और शान रहा है




तिरंगे तू मेरे वतन की आन-बान और शान रहा है
तू ही तो प्यारे असल में मेरे भारत का ताज रहा है।
रंग केसरी,श्वेत,हरा जब-जब तू फरफराता रहा है
शौर्य,शांति,विकास का गीत तू हमेशा गाता रहा है।
काल चक्र जैसे अनवरत सृष्टि में सदा बहता रहा है
तीली चौबीस सजा उर,दिन-रात का तू प्रतीक रहा है।
देख-देख सबका तुझे  गर्व से सीना फूल जाता रहा है
राष्ट्र-निष्ठा की शपथ तू हमेशा हमें याद दिलाता रहा है।
हर सैनिक वीर शहीद का तू सदैव प्रेरणा स्रोत रहा है
खेल-कूद में जीत का ज़ज्बा तू ही तो भरता रहा है।
वतन की मिटटी,मिटटी नहीं माँ का आँचल रहा है
तिरंगे अमर तू यही भाव तो हमें सीखाता रहा है।
ये अलग आज कि तुझ पे ही कोई सवाल उठ रहा है
दिले-महबूब से पर भला प्यार का कोई वक्त रहा है।
आसमां साफ,शुभ्र प्रकाश तब तो सवाल ये ठीक रहा है
पर घुप्प अँधेरे तुझसे ही तू उजाला हर पथ होता रहा है।
नमक-हराम,राजनीति को जो तुझसे जोड़ रहा है
कसम"तिरंगे"की वो अपनी ही कब्र खोद रहा है।
लाल भारत का हर सांस तुझसे ही जो लेता रहा है
जान न्योछावर के लिए आज वो तो  मचल रहा है।


















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Thursday, 18 February 2016

साईं तेरा जादू अब सिर चढ़ के बोलता है



साईं तेरा जादू अब सिर चढ़ के बोलता है  
जहाँ देखता हूँ बस तू ही दिखाई देता है । 
मेरी क्या बिसात जो ज़रा भी कुछ कर सकूँ 
मेरा हर काम तो तू ही हर बार किया करता है।
ये नाम,ये दौलत,ये बेवज़ह वाह-वाही मेरी 
क्या करूँ ये गुरुर भी तू ही तो दिया करता है।  
मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारा और गिरजाघर
रूप बदल कर बस तू ही तो रहा करता है। 
कायनात में छायी है हर तरफ तेरी खुशबू 
महसूस हो जाए अगर तो दीवाना बना देता है। 
सुख, दुःख उल्लास और बेचारगी सारी 
जिंदगी में हमारी तू ही तो भरा करता है। 
   

जब भी नाम लिया तुम्हारा




जब भी नाम लिया तुम्हारा
मुश्किलों से हुआ किनारा।
हर शख्स की जुबान पर
गुलज़ार हुआ नाम हमारा।
दिन को रात,रात को दिन बनाया
जैसा चाहा तूने मेरा वक्त बनाया।
तेरी चौखट झुका के माथा
हमने खूब नाम कमाया।
मेरी खातिर तूने जाने
 कैसा -कैसा वेष बनाया।
ज़र्रा -ज़र्रा महक रहा है
जब से तूने गले लगाया।