खेलन आए श्याम पिया जी,देखो मो संग होली।
मल-मल आंख निहार रही हूॅ,श्याम छवि मैं भोली।।
मैं ना जानूॅ,जाने कितने,जन्मन को मेरो भाग खुली।
देख छवि सांवरिया ज्यू की,जो है छैल-छबीली।।
हाथन रंग मले केसर और आंखें बड़ी रसीली। जाने कितने रंगों की,पास धरे है झोली।।
झूम-झूम नृत्य करत हैं,संग में बेढब टोली। करत फिरत हैं रास-रचैय्या हम संग हंसी- ठिठोली।।
बलिहारी श्री चरनन की जो, रंग दी मेरी चोली।
सतरंग चुनर घूमी मेरी और संग में पायल बोली।।
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