Monday, 26 August 2024

६८३:ग़ज़ल: एक बूंद शराब प्याले में छोड़ता नहीं

एक बूंद शराब प्याले में छोड़ता नहीं।
मेहनत की कमाई कभी फूंकता नहीं।।

वायदा यूं किसी से कभी हूं करता नहीं।
हां जो कर लिया तो फिर भूलता नहीं।।

जो मैं देख पा रहा आंखों से बस उतना।
दूर की उससे ज्यादा,यार सोचता नहीं।।

लिखा हो खत में नाम मेरा या रकीब का।
महज़ इससे ये होंसला कमतर होता नहीं।।

जब चल ही पड़े जानिब ए मंजिल को चूमने।
"उस्ताद" देर-सवेर से खास फर्क पड़ता नहीं।।

नलिन "उस्ताद"

Sunday, 25 August 2024

बधाई कृष्ण जन्माष्टमी की

सांवली सलोनी ऐसी छवि है हमारे कृष्णज्यू सरकार की।
अनंत कोटि अनंग भी लजाते देख कृष्णज्यू सरकार की।।
पीत झगुली झीनी-झीनी पहना जब सजाती नन्दलाल को।
मां यशोदा काजल लगाती नजर जो न लगे नन्दलाल को।।
अश्रुपूरित सजल नलिन नैन,गोपी सर्वत्र देखती कृष्ण ही।
भाव-विभोर क्या कहें,सो चाहती पढ़ें स्वयं हमें कृष्ण ही।।संग सखा अपने नंदनंदन काटते ऊधम हर गली गली ही।
दूध-दही खा चुपके-चुपके,हैं निडर विचर रहे हर गली ही।।
अद्भुत अलौकिक सुधा रस बरसाती प्रीत राधा-कृष्ण की।
भक्त सुकोमल हृदय आतुरता,मात्र दर्शन राधा-कृष्ण की।।
ब्रह्मा,विष्णु,तारकेश सब देव,नभ से झरझराते,पुष्पांजली।
तुमुल उदधोष से देते सबको बधाई कृष्ण जन्माष्टमी की।।

नलिन "तारकेश"

Saturday, 24 August 2024

६८२: ग़ज़ल:बिस्तर में आते ही नींद काफूर हो जाती है न जाने क्यों


बिस्तर में आते ही नींद काफूर हो जाती है न जाने क्यों।
याद उसकी बिछड़ कर सोने नहीं  देती है न जाने क्यों।।

वो मौजूद है जब हर जगह जर्रा-जर्रा फिर भी कैसे कहूं।
भला वो सांवली सूरत नजर आ नहीं रही है न जाने क्यों।।

बिछड़ कर उससे एक पल के लिए भी जीना है मुश्किल। 
ये फिर भी कमबख्त सांस आती जा रही है न जाने क्यों।।

वो कुछ नहीं कह रहा है फिर भी हम जान तो रहे सब।
बता फिर कौन सी बात कदम खींचती है न जाने क्यों।।

जाना है तय एक दिन सभी तो जानते हैं यहां से मगर। "उस्ताद" देखिए हमारी तैयारी आज भी है न जाने क्यों।।

नलिन "उस्ताद"