- राम राम रट श्री गणेश प्रथम पूज्य बन गए।
- राम राम रट भोलेशंकर "तारकेश" बन गए।
- राम राम रट नारद ऋषि निर्विकार बन गए।
- राम राम रट वाल्मीकि आदिकविराज बन गए।
- राम राम रट तुलसीदास भक्त शिरोमणि बन गए।
- राम राम रट हनुमान सर्वसिद्धिदाता बन गए।
- राम राम रट दशरथ कुल संग जगविख्यात हो गए।
- राम राम रट जानकी ब्रह्मांडनायक मिल गए।
- राम राम रट भरत भाई राम समान बन गए।
- राम राम रट लखन भाई जगताधार बन गए।
- राम राम रट शत्रुघ्न भाई रिपुदमन बन गए।
- राम राम रट विश्वामित्र जनकल्याण कर गए।
- राम राम रट अहिल्या के श्राप सभी मिट गए।
- राम राम रट केवट वंशतारक बन गए।
- राम राम रट कागभुशुण्डि कृपापात्र बन गए।
- राम राम रट सुग्रीव,विभीषण राजपाट पा गए।
- राम राम रट जीव अनेक जन्म सुफल कर गए।
- राम राम रट पतित पंक में,"नलिन" बन खिल गए।
- राम राम रट वरना तो अनमोल छन गए तो गए।
- राम राम रट,राम राम रट तन-मन सब निर्मल हो गए।
- राम राम रट सब जन मनवांछित फल पा गए।
I am an Astrologer,Amateur Singer,Poet n Writer. Interests are Spirituality, Meditation,Classical Music and Hindi Literature.
Wednesday, 31 August 2016
राम राम रट ...21 पंक्ति
Monday, 29 August 2016
कबहुं नयन मम सीतल ताता
कबहुं नयन मम सीतल ताता
होइहहिं निरखि स्याम मृदुगाता। सुंदरकांड १ ३/६
श्याम सलोनी रूप माधुरी छटा तिहारी
आँखें तरस रहीं देखने को छवि तिहारी।
मैं तो घिरी काम,क्रोध दानवों से भारी
अब तो ले लो सुध अविलम्ब खरारी।
तेरी विरदगाथा सदा भक्त हितकारी
मेरी अरज में भला क्यों देर भारी।
शंख,चक्र.गदा,पद्म चार भुजाधारी
विनती सुनो "नलिन"नैन बलिहारी।
Sunday, 28 August 2016
श्रीशंकरसर्पयाष्टक {हिंदी पद्य में अनुवादित }महिमामयी शिवपूजन स्तोत्र
कल्याण पत्रिका के शिवोपासनांक में शिव पूजनार्थ 8 पद्य वाले "श्रीशंकरसपर्याष्टकं"का हिंदी गद्य में पद्मश्री डॉ. श्रीकृष्णदत्तजी ने अनुवाद किया है। उसका ही पद्य रूप हिंदी में शिव भक्तों के आनंदार्थ एक विनम्र प्रयास मेरे द्वारा प्रस्तुत है-------
श्रीशंकरसर्पयाष्टक
जय जय शिवशंकर "तारकेश" प्रभु तुम्हारी सदा-सदा ही जय होवे
जय जय शिवशंकर "तारकेश" प्रभु तुम्हारी सदा-सदा ही जय होवे।
भक्तों पर कृपा बरसाते अधरों की हँसी शरदचंद्र कांति को करती फीकी
आप जगत के कारण स्वरुप हो,श्रीविग्रह छवि तिहारी गौर चंद्र सी नीकी।
नमन शैलजापति "नलिन"माल कंठ शोभा है जिनकी छायी
जटाजूट गंग तरंग विराजमान भाल दीप्ति सब जन है भायी।
हार सामान विशाल नाग वक्षःस्थल शोभित छवि न्यारी
भक्त आनंद अभीष्ट वैभव सदैव ही प्रदानकारी।
निमग्न स्तुति में ऋषि मुनि देव समस्त भुलोकवासी
तेरी कृपा से हे आशुतोष हम तो हो सके सुखरासी।
विराजित हिमाच्छादित कैलाश,पारिजात वृक्ष तले ही
त्रिनेत्रधारी,शूलपाणि,शत्रुमर्दन पिनाकधारी सदा ही।
हे अखिलेश्वर छवि आपकी शुभ चित्त मुनिजन विराजती
नमन श्रद्धा विश्वास से करता हूँ आपको पाने को सद्गती।
कर्म,प्रारब्ध से मुक्त कल्याणकारी हे सदाशिव शम्भो
हृदय से मेरे समस्त पाप को मुक्त कर दीजिये प्रभो।
नित्य मंगल विधान और "नलिन"चरण अनुराग दीजिये
शीघ्र ही समस्त विपत्तियों को हमारी नष्ट नाथ कीजिये।
अमरता पाने के इच्छुक देव अमृतपान करना थे चाहते
छीरसागर मंथन से प्रगट विष हुआ तो भयभीत हो कांपते।
कृपासागर भोलेनाथ द्रवित तब हलाहल पान कर गए
ऐसे आदिदेव मृत्युंजय भगवान् के चरण नत हम हुए।
अज्ञान अन्धकार जगत में विलीनव्याकरण का अलोक किया
पाणिनि को कृपादृष्टि से प्राचीन सूत्र उद्घाटित आपने किया।
ऐसे त्रिपुरारी भगवान् शिव को जो ज्ञान के हैं ज्ञानदाता
नमन करता हूँ मैं प्रभु आप तो हैं परम आंनददाता।
मस्तक विराजित आपके पवित्र गंगा,चंद्र की निर्मल किरणावली
पापविमोचक,भक्तकष्टविनाशकारी,सदा जय हो तेरी विरुदावली।
Friday, 26 August 2016
"मौन" श्रद्धा सुमन
सहारा इंडिया परिवार के हमारे एक कार्यालय सहयोगी मनोज श्रीवास्तव "मौन" के असमय काल कवलित होने पर ह्रदय छुब्ध है। सादर श्रद्धा सुमन ...... "मौन"
"मनोज" अंततः हो गया "मौन" है
याने काम,इच्छा से परे "मौन"है।
तो अब शेष रहा भला क्या है ?
परमसत्ता लीन हुआ जब "मौन" है।
दरअसल हर शब्द तो भोथरा है
झूठ,मक्कारी के रस से भरा है।
शुचितापूर्ण तो एक मात्र "मौन" है
मायावी पैंतरों से मुक्त तो "मौन" है।
सहारा कौन किसका कब तक रहा है?
जगत-व्यापार तो निष्ठुर बड़ा "मौन" है।
समय-असमय उसे कहाँ होश है
वो तो अपनी मस्ती में "मौन" है।
इसी कालचक्र के आगे पंक्तिबद्ध हैं
हम,तुम सभी होने को "मौन" हैं।
Wednesday, 24 August 2016
नील 'नलिन' सी आभा तेरी, देख देख हूँ दंग
तेरी न्यारी अलकावलि में उलझ उलझ कर रह जाये मन ।
ओ मेरे नटखट प्यारे तू तो सदा सदा सबका है मनमोहन।
जाने कैसी कैसी लीला करता समझ न पाए मन ।
कभी पुचकारे तो फिर छन में विचलित करता मन।
निष्ठुर छैल छबीले, सुन ले मेरी, तेरी तुझको कसम।
कब तक दांव पेंच दिखाए अपने, मुझको मेरे सनम।
गली गली में डोला जब जब मिला न तेरा संग।
थक कर जा बैठा तो तूने, लगा लिया हैं अंग।
नील 'नलिन' सी आभा तेरी, देख देख हूँ दंग।
कभी कभी क्यों दिखलाता, हर पल दिखला ये रंग।
Sunday, 14 August 2016
Saturday, 13 August 2016
शिव रूप छोड़,हनुमान बन भक्ति सबको सिखायी
बजरंगबली भला तेरी महिमा कहो किसने न जग गायी।
शरण आया जो तेरी हर मुश्किलों से निजात पायी।।
राम नाम महिमा अमित,अपार तूने ही फैलायी।
शिव रूप छोड़,हनुमान बन भक्ति सबको सिखायी।।
अष्ट-सिद्धि,नव-निधि प्राप्त कर जग हित लगायी।
हर घडी राम-राम बस यही एक अलख जगायी।।
समस्त कामना से दूर तूने बस राम उर लौ लगायी।
याद दिलाए बल तिहारा तब कहीं महिमा दिखायी।।
श्री राम के भक्त हित सदा करुणा अपार तूने दिखायी।
हर असंभव कार्य कर उसे श्री राम की प्रभुता बतायी।।
शरण आया जो तेरी हर मुश्किलों से निजात पायी।।
राम नाम महिमा अमित,अपार तूने ही फैलायी।
शिव रूप छोड़,हनुमान बन भक्ति सबको सिखायी।।
अष्ट-सिद्धि,नव-निधि प्राप्त कर जग हित लगायी।
हर घडी राम-राम बस यही एक अलख जगायी।।
समस्त कामना से दूर तूने बस राम उर लौ लगायी।
याद दिलाए बल तिहारा तब कहीं महिमा दिखायी।।
श्री राम के भक्त हित सदा करुणा अपार तूने दिखायी।
हर असंभव कार्य कर उसे श्री राम की प्रभुता बतायी।।
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