Saturday, 6 May 2023

517: ग़ज़ल:-तेरे दर पर सजदे

तेरे दर पर सजदे से निशान जब हमारे बने। 
बस इसी गुरूर के चलते,रूबरू न हो सके।।

सांसे थम सी जाती हैं देख के जब तस्वीर तेरी।
हो हकीकत जब मुलाकात तो क्या हालात बने।।

हर रेशे-रेशे,कतरा-कतरा जब तू ही रहे।
ये है तेरा,ये है मेरा,भला फिर कैसे चले।।

सफर जिंदगी का तंग तो कभी दरियादिली भरा। 
तू जो पकड़ ले अगर हाथ,फिर किसे परवाह रहे।।

तेरी इनायत जो देख सके रंजोगम में भी।
कहो क्यों न उसे हर कोई "उस्ताद" कहे।।

नलिनतारकेश @उस्ताद 

Friday, 5 May 2023

516:ग़ज़ल:-चांद तारे

चांद पूनम का कुछ रोज वजूद अपना गंवा देगा।
फिलहाल जो इतना हुस्ने जमाल पर इतरा रहा।।

छत पर ही टहलने लगा हूँ एक अर्से से अब तो मैं।
रास्ते पर चलना तो कसम से अब हमें दूभर हुआ।।

यूँ सच कहूँ तो ये उम्मीद है पूरी मुझे आसमान से।
एक-रोज आब-ए-हयात मेरी किस्मत से बरसेगा।।

कांटे गुनगुनाते हैं मेरी हौसलाअफजाई की खातिर।
चमन को भी रेत में चाहिए फूल एक खिलखिलाता।।

यूँ चांद-तारे नीले आकाश से राह दिखाते हैं सभी को।
एक "उस्ताद" ही मगर समझ पाता है उनका इशारा।।

नलिनतारकेश @उस्ताद 

ग़ज़ल:515:-दुआ मांगता है

  उम्र हो गई हमारी हमें अच्छे से पता है।                            मानता नहीं दिल बस यही एक खता है।।

  देख कर आईना पूछता हूँ कौन हो?                          जवाब उसका सुनना मगर सजा है।।   

 सितारों को टांकने का वादा जमीं पर।                   दोहराना आज भी कहाँ की वफा है।।

 तेरे मेरे दरमियाँ जो हुए खूबसूरत वाकए।                   आज तलक बस वही सुकूं दिला रहा है।।

 कट जाए आगे भी जैसे कटी आज तक।                    खुदा से "उस्ताद" यही दुआ मांगता है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद 


Thursday, 4 May 2023

514:ग़ज़ल:- पूनम का चांद

बमुश्किल इन्तज़ार के बाद पूनम का चांद दिखता है। 
आने के बाद जो रात का सारा अन्धेरा मिटा देता है।।
जो लड़ता है पूरी जद्दोजहद से मौत के मुँह में जाकर।
यकीनन खुदा भी हर वक्त उसका पूरा ध्यान रखता है।।
हर तरफ है बस एक जलजला सा ये दौर कैसा आया।
तार-तार कोई न कोई हर रोज इंसानियत कर रहा है।।
वक्त आएगा जब कोई फिर से हमारा "राम" आएगा।
इसी मुगालते में हर शख्स यहाँ औंधे सोया पड़ा है।।
"उस्ताद" जो हैं खुद को बताते सारे बुत परस्त हो गए। 
कहो अंधों को फिर यहाँ कौन भला आईना बेचता है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद 

Wednesday, 3 May 2023

513: ग़ज़ल :कुदरत भी सलीक़ा सीख रही

कुदरत भी सलीका सीख रही बदलने का आम आदमी से। वैशाख,जेठ में ओला,पानी गजब बरस रहा है आसानी से।।

जो ज्यादा ही शफ़्फ़ाफ* बनके गीत गाते थे इंकलाब के।  सर से पांव तक धंसे दिखते वही कीचड़ में बेईमानी से।।*उज्जवल

क्या-क्या दिखाए थे ख्वाब सुनहरे हमें भरी दोपहरी में।  बेजा हरकतों से अपनी रुला रहे खून के आँसू सभी से।।

  एतबार अब आप पर कोई करे तो कैसे करे जनाब।        झूठ के पुलिंदे टपकते हैं आप की हरेक कहानी से।। 

रोशनी में नहाता दिख रहा अलमस्त शीशमहल जो।            बना है गरीब-गुरबा की जी-तोड़ पसीने की कमाई से।

मगर तुर्रा तो देखिए अभी ठसक वही है "उस्ताद" की।        सब खांसना भूलकर हर बार हंसते हैं बड़ी ही बेशर्मी से।।


नलिनतारकेश @उस्ताद 

512: ग़ज़ल:- उसकी मोहब्बत में

उसकी मोहब्बत में वजूद खुद का मिटाना होगा।
प्यार का उन्वान अब इस तरह हमें पाना होगा।।

वो यूँ तो रहता मेरे दिल में ही है कहीं।  
उसको बस तबियत से खोजना होगा।।
 
वैसे जितना आसान लग रहा उतना है नहीं। 
मगर दरिया ए आग कदम तो बढ़ाना होगा।।

दिल जब उससे लगा ही लिया तो डरना क्या।
दुनियावी जद्दोजहद से हर हाल भिड़ना होगा।।

"उस्ताद" के आगे चलेगी नहीं तुम्हारी चालाकियां।
हर एक कदम दामन अपना बचाकर चलना होगा।।

नलिनतारकेश @उस्ताद 

Monday, 1 May 2023

511: ग़ज़ल दर्द ओ गम

रो-रो कर दिन रात अब तो कट रहे मेरे।

ख्वाब देखने की सजा नैन भुगतते मेरे।।

लिखना चाहता था कुछ लिख गया कुछ और।

उम्र के इस पड़ाव में दौर हैं नए दिखते मेरे।।

कलम तोड़ दिया था एक अरसा पहले।

मवाद पर अभी जा रहे हैं रिसते मेरे।।

तू नहीं आएगा लाख गुजारिश के बाद भी।

पता था मगर ताकना रास्ते कहाँ छूटे मेरे।।

 दर्द ओ गम सारा ग़ज़ल में अपना बहा देते हैं।

"उस्ताद" तो हर वक्त मुस्कुराते दिखते मेरे।।

नलिनतारकेश "उस्ताद "