Wednesday, 14 November 2018

गजल-27 बच्चा

दिल में हमारे बड़ा मासूम रहता है बच्चा।
जरा में रूठे और जरा में हंसता है बच्चा।।

दुनिया के पेंचोखम से नादान,अलहदा है।
तभी तो मस्त हो कुछ भी कर सकता है बच्चा।।

फूलों की तरह तितलियों के जज्बात समझता।
भरा सादगी से तभी तो महकता है बच्चा।।

सहने को सह सकता है हर मुश्किलों का दौर। बिना मां बाप के पर बड़ा तरसता है बच्चा।।

कभी तो है लगता पागल,सिरफिरे हैं हम ही । दुनियादारी को असल तो समझता है बच्चा।।

जमाना है बदल रहा मगर तेजी से अब तो।
कौड़ीयों के भाव सबको बेचता है बच्चा।।

छू लूं आसमां को या सोख लूं समंदर एक घूंट में।
"उस्ताद"का दिल तो ताउम्र सारी रहता है बच्चा।।

Tuesday, 13 November 2018

गजल-23

वक्त की मार पड़ी और बेसहारा हो गए।
भंवर वो छोड़ कश्ती हमसे किनारा हो गए।।

दिल लगाकर गैर से वो अंजान बने रहे। सबकी नजरों में तो हम बस बेचारा हो गए।।

कौन सा नापाक करम था जो ना किया उसने।
उल्टे तोहमत मढ रहे कि वो नकारा हो गए।।

जो अपनी जमानत पर मुंह छुपाते रहे।
वो ही कहते हैं आप आवारा हो गए।।

अपने पहलू में जो दी जगह हुजूर ने हमें। सबकी आंखों के चहेते हम सितारा हो गए।।

भीतर की रोशनी में जो अपनी नहा चुके। "उस्ताद" वो ही सब का सहारा हो गए।।

@नलिन  #उस्ताद

Monday, 12 November 2018

गजल- 22

जलवों का हर तरफ तेरे ही एक शोर है।
होती तेरे नाम से मेरी अब भोर है।।

उसके किस्सों की चर्चा कब तक करूं।
नशा तो उसका उतरा पोर-पोर है।।

बनो चाहे खलीफा कितने ही बड़े तुम।
उसके हाथों में रहती सब की डोर है।।

उठो,जागो,समझो अभी भी वक्त है।
बार-बार हमें कहता वो झकझोर है।।

नजरों से मिलाकर नजरें बात करता नहीं। लगता है कोई तो उसके दिल में चोर है।।

लाख समझाओ दो दुहाई ऊंच-नीच की।
चाह पर अपनी कहां चलता मगर जोर है।।

हमने तो उसे अब अपना "उस्ताद" बना लिया।
इनायतों का कहां उसकी बता ओर-छोर है।।

@नलिन #उस्ताद

Tuesday, 6 November 2018

गजल-17

सबको दिपावली की ढेर सारी बधाई
☆☆☆☆¤¤卐卐¤¤☆☆☆☆

घर-घर लो हो गई हर तरफ रोशनी दिवाली में।
उत्साह,उल्लास,उमंग कि बोहनी दिवाली में।।

लक्ष्मी खिलखिला नाचती डूब के गहरे जश्न में।
रिद्धि-सिद्धि संग गणेश की खूब छनी दिवाली में।।

मची खूब होड़ देखो एक दूजे का करने को मुंह मीठा।
लज्जत-ए-पकवानों की खुशबू तो है महकनी दिवाली में।।

परिधानों में बढ़कर एक से एक सजे हैं सभी। वणिकों* की भी बढ़ रही है आमदनी दिवाली में।।*व्यापारी

क्या खूब जमीं से आसमां तक दिख रहे आतिशबाजी के नजारे।
फुहारों से इंद्रधनुषी सजी मस्त रजनी* दिवाली में।।*रात

इल्तजा बस यही है उस अपने परवरदिगार से।
दिलों में हो"उस्ताद"सब के रोशनी दिवाली में।।

@नलिन #उस्ताद

Monday, 5 November 2018

गजल-16

हां ये सच तो है मैंने तुझसे प्यार किया है।
या खुदा तुझ पर हर हाल बड़ा एतबार किया है।।

कहते हैं लोग अक्सर देते हुए ताना मुझको। प्यार में तूने कैसा हाल ये यार किया है।।

मुझको कतई परवाह नहीं जो होगा देखा जायेगा।
तुझे रिझाने खातिर वैसे नख-शिख ये सिंगार किया है।।

तेरे-मेरे बीच की बातें क्यों भला जगजाहिर हों।
याद रखना भूल ना जाना हमने जो करार किया है।।

ये सही बात की जिस्म की कश्ती वहां जाती नहीं।
दरिया-ए-इश्क तो"उस्ताद" रूह से पार किया है।।

Saturday, 3 November 2018

गजल-14

इशारों-इशारों में सारी वो तो बात करते हैं।
कभी अदा तो कभी हमको निगाहों से मारते हैं।।

हम भी हो चुके हैं उनके अब तो बड़े मुरीद।
हर जगह अब तो बस उनको ही देखते हैं।।

प्यार करता कहां कोई ये तो है हो जाता।
पुराने जन्मों के भी तो कुछ हिसाब रहते हैं।।

करो प्यार तो कतई ना डरो जमाने भर से।
खुदा भी हकीकी* प्यार की इबादत करते हैं।।*सच्चे

जाने कितना कहा गया और कहा जायेगा मुद्दतों।
मायने भला प्यार के कहां कर हम बखान सकते हैं।।

ता उम्र कुछ है जो अधूरेपन का दिलाता अहसास।
तलाश में जिसकी जिस्म दर जिस्म हम युगों भटकते हैं।।

वो जैसा है उसे बस वैसा ही अपना लो।
"उस्ताद"प्यार में नहीं गणित के नियम  चलते हैं।।

@नलिन #उस्ताद

Friday, 2 November 2018

गजल-13

मुझे बहुत बार-बार समझाता दिल मेरा।
प्यार दरअसल बहुत बरसाता दिल मेरा।।

मौत से अक्सर मुठभेड़ को तैयार दिखता। कभी बेबात है मगर रूलाता दिल मेरा।।

जोश,जज्बा लिए फिरता कभी तो लोहे सा। कभी बन के ये पारा फिसल जाता दिल मेरा।

जाने किस चीज पर मचल जाए बच्चे सा। बड़ी मुश्किल से हूं समझाता दिल मेरा।।

गलत रास्तों का ही नहीं केवल मुन्तजिर*।
नूरे हक भी कभी जगमगाता दिल मेरा।।
*प्रतिक्षारत

कदमों में"उस्ताद"के जब-जब सजदा किया।
लगा बढ के वो गले महकाता दिल मेरा।।