Tuesday, 11 November 2014

255 - साईं केवल तू ही एक सच्चा 

साईं केवल तू ही एक सच्चा
बाकि जग तो  देता है गच्चा।

मेरे जीवन का एक सपना
 मैं बन जाऊँ तेरा अपना।

जब -जब तेरा नाम हूँ लेता
दुःख, पीड़ा का नाम न रहता।

लेकिन जाने क्या  है होता
नाम तेरा मैं ले न पाता।

सुख तेरी शरणागति  में मिलता
पर माया सुख में रहा भटकता।

तूने मुझे कितनी बार उबारा
लेकिन मैंने तुझे सदा बिसारा।




Monday, 10 November 2014

254 - रूह के श्रृंगार की बात

मौसम तो बदलते जाएंगे साल दर साल यूहीं
दिलों में बहार के अब तराने ज़रा छेड़िये।

मंजिलें दूर हैं भटक रहे हैं लोग सभी
स्नेह,भाव,विश्वास से फ़ासलों को पाटिए।

रंग व्यक्तित्व के सभी अलग पर हैं बेशकीमती
इन्द्रधनुष बना इन्हें साथ-साथ जोड़िये।

जोश,जज़्बा हो अगर तो बदल सकती है तकदीर भी
चुनौतियों के जाल को बस जरा तदबीर से खोलिए।

जुल्फ के श्रृंगार की बात तो बहुत हो गयी
रूह के श्रृंगार की बात भी अब जरा कीजिये। 

Sunday, 9 November 2014

253 - तू राम-राम रट 

भीतर बाहर मन के कोने-कोने
उज्जवल, तू राम-राम रट।  शुद्ध निर्मलता पाने
राम-राम रट रसना, तू राम-राम रट।

राम रतन को जिह्वा में धर कर
आलोकित  कर ले सारा संसार
राम-राम.. . .

दिव्य चेतना आधार बना कर
तन मन प्रभु को अर्पित कर
राम-राम   .......

सूर, चैतन्य, मीरा, तुलसी ने खुद को एकचित्त कर
नित ध्याया हरी को जैसे, तू भी ध्यान लगाया कर
राम-राम   ……। 

Friday, 7 November 2014

252 -निज बुधिबल भरोस मोहि नाहीं

निज बुधिबल भरोस मोहि नाहीं , ताते विनय करउ सब पाहीं। १/८

यद्यपि हूँ मैं पातकी तो भी छल प्रपंच से
हाथ जोड़ हूँ खड़ा मुक्त होने के लिए।


पूरी कायनात  से विनम्र हो सद्भाव  से
करता हूँ मैं प्रार्थना स्नेह प्यार के लिए।

दुआ करें ये सभी मेरी खातिर रब से
लायक बना ले वो मुझे अपना होने के लिए।

वरना  तो कहाँ बच पाउँगा इन हालात से
सो करना मदद सभी मेरे जीवन के लिए।

खुद पर यकीं नहीं मुझे एक  बार से
अनुनय तभी तो है आपसे अपने लिए।


Thursday, 6 November 2014

251 - गुरुवर तेरे 'नलिन' चरण

गुरुवर तेरे 'नलिन' चरण, मुझको सदा लुभाते।
जैसे मधु पाने की खातिर भौंरे, पुष्प-पुष्प मंडराते।

गुरु रज पाना बड़ा कठिन है, माया जग में चलते।
लेकिन कृपा यदि हो जाए, पूरे सपने होते।

तुझको पाने की चाहत, यदि हो गहरी हममें।
हर मुश्किल मिट जायेगी, दर्शन होंगे पल में।

रोम-रोम पुलकेगा तेरा, फिर तो उसके आने से।
एक बार बुला के देख,'नलिन' उसे तू भाव से।

Tuesday, 4 November 2014

250 - साईं कृपा से मेरी जिंदगी 








साईं कृपा से मेरी जिंदगी
बेखौफ, मस्त हो चल रही।

हर दिन, हर तरफ से जैसे
खुशियों की बरसात हो रही।

उम्मीद थी किसे अंधेरों में घिरे
नूरे जिन्दगी जो अब आम हो रही।

यूं ही चलता रहेगा ये सिलसिला
नज़रें इनायत तेरी जो हो रही। 

Sunday, 2 November 2014

249 - साईं तेरे रंग

साईं तेरे सब रंग हैं कितने अलहदा
पर सभी में कृपा का रंग मिला हुआ।

जिधर भी देखें हर तरफ तू है  खड़ा हुआ
हर रूप,हर शै पर है जलवा खिला हुआ।

तेरी मर्ज़ी से ये सारी कायनात चल रही
मैं तो बस यहाँ पर एक छुद्र कण हुआ।

रौशन हों सबके घर श्रद्धा - विश्वाश से
प्यार का मसीहा तू जग विख्यात हुआ।

दोस्ती,मोहब्बत सिखाने सभी को
साईं रूप में तू धरा अवतरित हुआ।