Friday, 29 September 2023

596: ग़ज़ल: वो मुझे चाहता है

वो मुझे चाहता है ये तो पक्का पता है।
जाने इजहार क्यों मुझसे नहीं करता है।।

जो पूछता हूँ उससे हिम्मत करके मैं कभी। 
वो अनसुना कर बातों का सिला बदलता है।।

जरूर हुआ है कोई मुझसे ही बड़ा गुनाह।
यूँ उसे हर कोई बड़ा नरम दिल कहता है।। 

बस ख्यालों में अपने डूबे रहना,मुझे बड़बड़ाने देना।
ये कहाँ कुछ अपनी तरफ से एक लफ्ज बोलता है।।

मेरा होकर भी मेरा भला अब तक जाने क्यों नहीं हुआ।
क्या उसे नहीं गुमान इस सबसे दिले "उस्ताद" टूटता है।।

नलिनतारकेश@उस्ताद 

Thursday, 28 September 2023

597: ग़ज़ल: इसे सबसे छिपाना चाहिए

मरने का कोई न कोई तो बहाना चाहिए।
मुझे तेरे प्यार का तभी तो ठिकाना चाहिए।। 

रोशन होने लगी तेरे ख्याल से जब मेरी जिंदगी।
किसी गैर को भला फिर क्यों रिझाना चाहिए।।

जो मिले जाए किसी को साथ तेरा किस्मत से। 
उसको तो हर हाल बेखौफ हो इतराना चाहिए।।

गम और खुशी तो आनी-जानी है रोजमर्रा में। 
इन वजहों से भला क्यों उसे भुलाना चाहिए।।
 
नजर लगाते हैं जमाने वाले प्यार पर हरेक के।
"उस्ताद" तभी तो इसे सबसे छुपाना चाहिए।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Monday, 25 September 2023

595: ग़ज़ल: दहलीज पार कर न सका

नब्ज़ को टटोला,जब उसकी चारागर ने,हाथ लगा।
बंद थी वो तो मगर,दिल नाम लेकर,था धड़क रहा।।

मासूम चेहरा बनाकर,रंग-बिरंगे जज्बात सजा लिए।
महफिल को उसने ऐसे,दो घड़ी सरेआम लूट लिया।।

आईने ही आईने आशियाने में,उसके लगे हैं चारों तरफ।
सब देखते हैं अक्स अपना,खुद को पर है उसने छुपाया।।
  
नीले गगन में टिमटिमाते तारे,बेतकल्लुफ बतियाते दिखे। जमीं पर मगर कोई भी,पार दहलीज अपनी न कर सका। 

"उस्ताद" तुम तो लिख सकते हो कुछ भी,किसी पर भी। 
ये इख्तियार-ए-हुनर तो तुमको मलिक ने है अता किया।।

नलिनतारकेश@उस्ताद

Sunday, 24 September 2023

594: ग़ज़ल: यायावर चलिए

ज्यादा मगजमारी,बारीकियों पर न कीजिए।
जब तक सुकून मिले,तब तलक मौज करिए।।

आसान नहीं रही,जिंदगी की राहें कभी भी।
लबों पर किसी जुगत,हंसी बचाकर रखिए।। 

अपना कहते हैं,मानते हैं अगर किसी को।
उनसे तो दिल खोल कर,बतिया लीजिए।।

सावन नहीं बरसे बादल तो,मुरझाइए जरा भी नहीं। 
परवरदिगार की नेमत पर हर-हाल,भरोसा पालिए।।

"उस्ताद" चलते हैं,जानिब-ए-मंज़िल सब अकेले ही। 
मिले कोई हमसफ़र तो ठीक,वरना यायावर चलिए।।

नलिनतारकेश@उस्ताद
SKETCH BY "SIDHARTH" MY DEAR BHATIJA

Saturday, 23 September 2023

593: राधा अष्टमी नन्दा अष्टमी की हार्दिक बधाई

राधा अष्टमी एवं नन्दा अष्टमी की बहुत बहुत बधाई। 
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पदचाप से जो नूपुर छनछनाते हैं लाड़ली ज्यू के।
भक्ति सौभाग्य द्वार वो खोलते हैं लाड़ली ज्यू के।।

कृष्ण-कृष्ण रटते तो सभी भक्त सुबह शाम मगर।
बगैर अनुशंसा कृपा कहाँ करते हैं लाड़ली ज्यू के।।

हंसी-ठिठोली कितनी भी करते हों बात-बात पर चाहे।
रूठ जाएं तो त्वरित श्रीचरण दबाते हैं लाडली ज्यू के।।

राधारानी हैं हमारी तो बड़ी कोमल,माखन-मिश्री जैसी। 
तभी कृष्ण,षटरस लुभाते कहाँ,आगे हैं लाडली ज्यू के।।

राधा जी हैं धारा,वस्तुतः निर्मल भक्ति की साक्षात प्रतिमूर्ति। 
"उस्ताद" तभी कान्हा,रीझ भक्तों पर जाते,हैं लाड़ली ज्यू के।।

नलिनतारकेश@उस्ताद

Friday, 22 September 2023

592:ग़ज़ल: ईनाम कर दूं

चलो एक ग़ज़ल और तेरे नाम कर दूं।
अब ये इश्क मैं अपना सरेआम कर दूं।।

कड़ी धूप है जमीन रेत भी खूब तप रही।
तू चले साथ तो दिन को भी शाम कर दूं।।

ये पस-ए-मंजर* हुआ खूबसूरत तेरे वजूद से।*पृष्ठभूमि
गजब की तेरी इस जीनत* को सलाम कर दूं।।*शोभा

तेरे दर पर आया हूँ पूरे होश-ओ-हवास से यारब।
जो एक इशारा करे तो खुद को गुमनाम कर दूं।।

तू जो मेरा होकर मुझे हर गम से निजात दे रहा।
बता "उस्ताद" इस पर अता क्या ईनाम कर दूं।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Thursday, 21 September 2023

591: ग़ज़ल:गोल दुनिया

दर्द हद से बढ़ा तो तबीयत खराब हो गई।
शुक्र है पर इस बहाने दवा शराब हो गई।।

जो इश्क परवान चढ़ा तो जरा कयामत देखिए।
लचकती टहनी पर वो लाल सुर्ख गुलाब हो गई।।

इश्क में फेंका जो कंकर यार ने छेड़ने की खातिर।
हंसी लबों पे उसके खिलखिलाती तालाब हो गई।।

मिलेंगे मुहब्बत में कभी तो हम चाहे हो रहे जुदा आज।
बात ये दर्ज गोल दुनिया बतौर हिसाब-किताब हो गई।। 

डूबे जो बस उसके ही एक रंग में तो "उस्ताद" ये हुआ। 
हकीकत जो लगती थी जिंदगी वो महज ख्वाब हो गई।।

नलिनतारकेश @उस्ताद