Sunday, 24 November 2019

गज़ल: 276 - चाहतें तुझे पाने की

चाहतें तुझे पाने की हैं मेरी समंदर की लहरों सी।
घूम-फिर के आती हैं अपनी जिद पर बच्चों सी।।
यूं समझता है तू कही-अनकही सब बातें मेरी।
मगर हरकतें हैं तेरी वही फरेबी नाजनीनों सी।।
आया तो था यहाँ तुझसे मिलूंगा बस यही सोच कर। भटकाती रही मगर जिंदगी कहाँ से कहाँ बादलों सी।।
ऑखों में धुंआ-धुंआ सा दिल में बेचैनी है बड़ी।
सुलगती रहेंगी बता कब तलक सांसें अंगारों सी।।
"उस्ताद" बस तेरी इनायतों पर चल रही है जिन्दगी।
वरना तो उम्मीदें सभी लगती यहाँ अब झूठी दलीलों सी।।
@नलिन#उस्ताद

गडल:275-गोदी में अभी

गोदी में अभी खेलते नहीं परिंदे मेरे। 
बाकी हैं प्यार के सबक सीखने मेरे।।
अभी तो चखी नहीं एक घूंट मय की।
लो अभी से हैं मगर पांव बहकते मेरे।।
चल पड़ा हूँ जो उसका दीदारे ख्वाहिश लिए।
हौसला यूं बना कि पाँव नहीं अब थकते मेरे।।
घड़ी की सुईयों का यहाँ भला कौन मुंतज़िर*है।*प्रतिक्षारत
बसे हैं जबसे आँख में लीक से हटे सपने मेरे।।
ये खामखा लगे वर्जिश*किसी को तो लगा करे।*कसरत
बस उसके चरचे ही दिलों के तार हैं छेड़ते मेरे।।
गजल लिख रहा हूँ हर रोज एक नई मैं तो।
"उस्ताद"है अभी जिंदा कलाम यह बताते मेरे।।
@नलिन#उस्ताद

Thursday, 21 November 2019

गजल:274-कभी खिलखिलाने रोज़ पड़े

कभी खिलखिलाते रो पड़े,कभी रोते-रोते हंसने लगे। प्यार में जब से हम पड़े अजब हरकतें करने लगे।।
कुछ था नहीं जमीनी बस ख्वाब एक रूमानी रहा।
फसाने को समझ हकीकत यार हम मचलने लगे।। 
एक अजब नशा मदहोशी सी रहती है अब तो।
लोग सरेआम अब तो हमें शराबी कहने लगे।।
वो निभायेगा या साफ मुकर जाएगा वादे से अपने।
बेवजह की इस बेकली से अब तो ऊपर उठने लगे।।
प्यार किया है हमने तो निभायेगा फिर भला कौन कहो।
परवान इस तरह आजादी को बख़ूबी अपनी चढ़ाने लगे।।
प्यार हो सच्चा तो चाहता कहाँ कुछ भी महबूब से।
खुदा का शुक्रिया हम ये बारीकियां हैं समझने लगे।।
जबसे हमारे दिल में उसका दिल धड़कने लगा।
कहो अब कहाँ तन्हा उस्ताद हम रहने लगे।।
@नलिन#उस्ताद

गजल:273-भीगी जुल्फें

भीगी जुल्फें झटक के जो लहराई उसने।
दिले रेगिस्तां आबे-हयात* बरसाई उसने।।*अमृत
हर तरफ,हर गली,हर मोड़ चर्चे हैं उसके।
गजब खूबसूरत ये कायनात बनाई उसने।।
समंदर से जाकर मिलने को बेचैन है दरिया।
दिल में गहरे लगन ऐसी मीठी लगाई उसने।।
होगी हर रोज़ गुफ्तगू मीठी-मीठी अब तो।
बदल के लकीरें नई तकदीर रचाई उसने।।
"उस्ताद"आँखों में सुर्ख गुलाबी डोरे छा गए।
जबसे यकबयक* एक हंसीं झलक दिखाई उसने।।*एकाएक 
@नलिन#उस्ताद

Monday, 18 November 2019

272:गज़ल-आँखों में चढ़ी है

आँखों में चढ़ी है ऐसी गज़ब की खुमारी उसकी।
खुली हो,बंद हो अब तस्वीर मिटती नहीं उसकी।।
सुबह-शाम,हर घड़ी यही चाहत मुझमें है बाकी। 
सुनता रहूँ बस इनायतों की चर्चा अजूबी उसकी।।
वो मेरे आस-पास है खुद ही राज ये खोला उसने।
लो मैं भी सूंघता फिर रहा सांसे महकती उसकी।।
कदम दर कदम ठोकरें खा रहा हूँ जैसे शराबी।
अजब हाल पर मिटती नहीं दीवानगी उसकी।।
बहुत बोलता है इशारों-इशारों में वो तो हमसे हरदम।
समझ सको जो बिखरी जर्रे-जर्रे में खामोशी उसकी।। "उस्ताद"ये नशा भी अजीब है जो उतरता ही नहीं।
दिखाता है कैसे-कैसे अजब मंजर बलिहारी उसकी।।
@नलिन#उस्ताद 

Saturday, 16 November 2019

271:गजल-ख्वाब में भी दिखते रहो

ख्वाब में भी  दिखते रहो तुम तो गनीमत है।
वरना तो ये जिंदगी बस एक जहालत* है।।*अज्ञानता 
हकीकत से रूबरू होना तेरी ही बस इनायत है।
सच तो ये कि होती नहीं कोई ऐसी इबादत है।।
बातें हवा में शेखचिल्ली सी चाहे जितनी बना लें। 
हमको कहाँ पल भर भी रहती ज़रा तेरी हसरत है।।
कूचा-कूचा हर शय जलवा ए कारीगरी। 
भरती हर अदा तेरी हममें बड़ी हैरत है।।
आँखें लड़ाने की सोचना उस आफताब से। 
बड़ी बचकानी भरी बेजा ये तेरी हरकत है।। 
दुनियावी रंगीनियां हर कदम भरमाती रहेंगी ताउम्र ।
भूलना न उसे कभी वरना तो"उस्ताद"फजीहत है।।
@नलिन#उस्ताद

Friday, 15 November 2019

गजल-270:हाथों में पकड़ा दिया

उमा कहउँ मैं अनुभव अपना।सत हरि भजनु जगत सब सपना।(रामचरितमानस 3/38/5)
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हाथों में पकड़ा दिया सबके एक झुनझुना उसने।
गम और खुशी बीच सबको खूब उलझाया उसने।।
हर कोई दूसरे के हाथ की शय से बस हैरान है।
अपने हाथ मिला क्या देखना ये भुलाया उसने।।
हर बात बच्चों सा रोता और मचलता है आदमी।
छोटी-बड़ी हर बात पर हमें बहुत फरमाया उसने।।
सारी दुनिया खड़ी महज ये झूठ की बुनियाद पर।
बस दिखा चांद का अक्स पानी में बहलाया उसने।।
कोई नहीं तेरा"उस्ताद"कागजी लफ्फाजी है सब।
बेवजह के मकड़जाल बारीकी से फंसाया उसने।।
@नलिन#उस्ताद