Thursday, 4 April 2019

भारतीय नववर्ष का श्रीगणेश

6April 2019 भारतीय नववर्ष का श्रीगणेश
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भारतीय संस्कृति के उन्नत ललाट पर चंदन- वंदन हो रहा।
शुभागमन नव-संवत परीधावी का अभिनंदन हो रहा।।
रितु वसंत कलरव कर रही वन-उपवन डाली डाली।
मार्तंड मीन राशिचक्र सजग,सज्ज नवसृजन हो रहा।।
ध्वज-पताका केसरिया फहर रही मन-मंदिर के धवल शिखरों पर।
देखो वीणा के तारों पर उल्लासित मृदुल-मदिर आचमन हो रहा।।
जन-जन नव परिधान आकंठ मगन नवरंग अद्भुत कुसुम खिले।
पथ सजे बंदनवार,गली-गली सुगंधमय गुलशन हो रहा।।
नृप शनि,मंत्री रवि,सस्येश मंगल बन नवग्रह स्वभूमिका ले रहे।
देश-विदेश काशी से क्योटो तक नमो-नमो हर घर-आंगन हो रहा।।
सबका साथ-सबका विकास,निर्मल "नलिन" शुभ्र खिलने लगा।
नामुमकिन था जो रामराज्य कलियुग भी वो
अब मुमकिन हो रहा।।

Thursday, 21 March 2019

होली साईं आंगन

खेली अजब गजब होली साईं आंगन आज सबने।
मस्त उड़ाया अबीर गुलाल साईं आंगन आज सबने।।
काम क्रोध समस्त विकार मिटाकर निमॆल तन मन।
भर दिया भक्ति रस रंग साईं आंगन आज सबने।।
एक दूजे के रंग में रंग कर अपनी सुध बुध भूले।
ताल कदम एक सुर साधे साईं आंगन आज सबने।।
तन मन भीगा रोम रोम हम सबका एक साईं के रंग में।
आंखों से क्या खूब पिया मधुरस साईं आंगन आज सबने।।
अब तो प्रीत की लौ जली रहे और उठता रहे आॅखन यही खुमार।
मांगा नतमस्तक हो साईं से वरदान साईं आंगन आज सबने।।
@नलिन #उस्ताद

Thursday, 14 March 2019

गजल-116 दरदे गम का जब से

दर्द-ए-ग़म का जब से हम इजहार करने लगे हैं।
उसको नासूर बनाने में लोग दिखने लगे हैं।।अजब सिफत है दुनिया में नामुरादों की। जिसे सहारा दो वही बात-बेबात तनने लगे हैं।।
तुम्हारी आंखों में जो ये काले-बादल हैं दिखते।
बरबस हमें देख वो आजकल बरसने लगे हैं।।
आईना भी तोड़ दिया लो अब हमने।
ख्वाब जो अंगड़ाई ले महकने लगे हैं।।
बिन पिए चला जाता नहीं अब तो दो कदम।  पीकर दो घूंट इश्के हकीकी समझने लगे हैं।।
एक अजीब नशा चढ़ रहा है फितरत में हमारी।
लोग हमको अब पागल समझने लगे हैं।।
है सितारों की क्या बिसात कहो "उस्ताद"।
वो तो हमसे पूछ अब तकदीर लिखने लगे हैं।।
@नलिन #उस्ताद

Wednesday, 13 March 2019

गजलः 115 जुल्फ की पेंच खोल

जुल्फ की पेंज खोल लट लहरा दी उसने मेरी।
उथली सी जिंदगी क्या खूब गहरा दी उसने मेरी।।
काॅच-पत्थर,सीप-मोती,क्या कुछ बटोर रहा था मैं।
चाहतें सारी बन के तूफान बिखरा दी उसने मेरी।।
आज हूं कल नहीं ये खौफ तो हर आदमी का है।
मगर सच कहूं यह बात भी बिसरा दी उसने मेरी।।
दुनिया उसकी,नूर उसका हर तरफ जलवा फरोज दिखा।
यूं हकीकत से,रूबरू मुलाकात करा दी उसने मेरी।।
अब वो है"उस्ताद"और शागिदॆ हूॅ मैं उसका।
यह बात कायदे से जहन उतरा दी उसने मेरी।।
@नलिन #उस्ताद

Thursday, 14 February 2019

गजल-114 प्यार तो सारा

वेलेंटाइन डे पर विशेष
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प्यार तो सारा अब बाजार बन गया है। दुकानों का महज कारोबार बन गया है।। बगैर डूबे मन भीग जाता था जिस प्यार में। जिस्मानी रिश्तों का वही अब करार बन गया है।।
एड़ियां घिसनी पड़ती हैं गर्म रेत जाने कितनी।
प्यार तो मगर अब एक इश्तिहार हो गया है।।
कायनात के हर रंग को गौर से जो पढ़ सको।
प्यार का हर शै इजहारे पुकार बन गया है।।डूब गया अब इश्के रूहानी बहता है जिस दर पर।
"उस्ताद"भी खा के ठोकरें होशियार बन गया है।।
@नलिन #उस्ताद

Wednesday, 13 February 2019

गजल-113 वक्त ठोक बजा

वक्त ठोक बजा सब समझाता है।
हुनर उसे यह बखूबी आता है।।
जब मकसद ही हो किसी का बरगलाना।  समझाने पर भी कहां समझ पाता है।। इल्जाम थोप बेवफाई का उस पर।
खुद वो ही रास्ता भटक जाता है।।
कठगरे में वो खुद को ही खड़ा पाता।
गैर को जब भी आईना दिखाता है।।
गड्डी फेंटो हर बार चाहे जितनी।
जोकर को कहां कोई मिलाता है।।
उस्ताद उसकी नासमझी का आलम देखो।
हर बार सफेद झूठ बेशर्म दोहराता है।।
@नलिन #उस्ताद

गजल-112 सूरज की तरह

सूरज की तरह रहा जलता हर रोज।
मगर रोशनी रहा बांटता हर रोज।।
दे रहा खुद को दिलासा बड़े प्यार से।
हार कर भी हार कहां मानता हर रोज।।
भूल गया गिनती याद ही नहीं अब तो।
जख्म इतने मिले कहां गिनता हर रोज।।बढते कद से उसके है खिसियाया गठबंधन। 
अंगूर खट्टे बार-बार तभी कोसता हर रोज।।
लहरों सा चट्टानों पर पटका सिर बार-बार।
तब कहीं मिल रहा सपाट रास्ता हर रोज।।
काटता शाख पर बैठ जो उसी दरख्त को।
वो ही है उसे बेवजह कोसता हर रोज।।
दिन-रात बढाने में मशरूफ है देश का नाम।
देख छाती पर दुश्मनों के सांप लोटता हर रोज।।
"उस्ताद"पाले हैं इतने संपोले आस्तीन में।
भुगत रहे हैं ये उसकी ही तो खता हम हर रोज।।

@नलिन #उस्ताद