Saturday, 20 August 2022

449:ग़ज़ल

 जाने वाले तो चले जाते हैं चुपचाप छोड़कर।

रह जाते हैं हम यहाँ बेबस बस हाथ मलकर।। 


बुजुर्गों के साए बरगद की घनी छांह से हमारे।

हर कदम जो रखते कड़ी धूप से हमें बचाकर।।


अतिथि कोई रहा ही नहीं जो आए बिन बुलाए।

इतराइए नसीब पर जो आ जाए कोई बुलाकर।।


कुदरत भी रंग बदल रही है देख अब हमारा चाल-चलन। गरजते हैं बादल कहीं तो बरसते है कहीं अलग जाकर।।


कौन बनेगा भला आजकल कहो किसी का यहाँ ज़मानती।

"उस्ताद" खुद से ही चली हैं जब हमने हर चाल छुपाकर।।


नलिनतारकेश @उस्ताद

Friday, 19 August 2022

जीवन-मंथन तब मिलता मक्खन

जीवन-मंथन तब मिलता मक्खन 
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कहीं कनक-घट गरल अपार भरा है।
कहीं मृण-भांड पीयूष पटा दिखता है।
हे परमेश्वर सारा मायावी संसार ये तेरा। 
उलटबांसी सा सच में अबूझ बड़ा है।।

कहीं विलास का उत्कर्ष बड़ा है।
कहीं खाद्य का अकाल पड़ा है।
दो दिन का यह दुनिया का मेला। 
हर पल अद्भुत रोमांच सना है।।

कहीं नवागत का मधुर राग सुना है।
कहीं विछोह का शोक रिस रहा है।
आवागमन के रहस्यमय अनुष्ठान का।
हमको कहाँ अभिप्राय ज्ञात हुआ है।।

कहीं तार-तार रक्त संबंध हुआ है।
कहीं अंजानों से दिल का तार जुड़ा है।
भांग-धतूरे का प्याला पीकर कुछ ज्यादा।
लगता है प्रभु तूने यह सारा संसार रचा है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Thursday, 18 August 2022

448:ग़ज़ल

कृष्णजी के जन्मदिन पर सभी को बधाई ।
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सांवली निगाहों के जाम जब से पिए हैं।
बुतखाने में देखिये बुत बने हम खड़े हैं।।

जुल्फों की गिरफ्त में जबसे घिरे हैं।
कहने के काबिल कहाँ कुछ रहे हैं।।

आमद की बात सुनी है हमने जबसे।
रात-रात जग कर बस पहरे दिए हैं।।

एक हल्की सी तान सुनी है दूर से आती हुई।
बस उसी धुन पर हम तो मदहोश हो गए हैं।।

जलवों का तेरे जिक्र करें तो करें कैसे भला।
सुन-सुन के किस्से यारब जवान हम हुए हैं।।

एक नूर तेरा ही हर महफिल में रहा है चर्चे का सबब।
हम तो उस्ताद बस तुझ पर जां-निसार करते हैं।।

नलिनतारकेश@उस्ताद

Monday, 15 August 2022

घर-घर तिरंगा

घर-घर तिरंगा
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बहुत बधाई सभी को स्वतंत्रता दिवस के अमृत-महोत्सव  की।
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घर-घर इठला के अपना आज देखो फरफरा रहा तिरंगा।। 
आजादी के अमृतमहोत्सव पर शान से लहरा रहा तिरंगा।।

जाति,धर्म,वर्ण,संप्रदाय भेद,झुठलाने को तत्पर रहा तिरंगा। 
एकसूत्र बांध हम सबको साथ-साथ,चलना सिखा रहा तिरंगा।।

स्वयं से नई प्रेरणा,नई सीख लेकर बढ़ता ही जा रहा तिरंगा। 
बुलंदियां आकाश की छूने को संकल्पबद्ध दिख रहा तिरंगा।। 

स्वर्णिम भविष्य के कर्म पथ पर अग्रिम भूमिका लिख रहा तिरंगा। 
शान्ति,प्रेम,सद्भाव को विश्व में बढ़ाने हेतु नेतृत्व कर रहा तिरंगा।।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Friday, 12 August 2022

447: ग़ज़ल

उतना ही जानिए जितना जरूरी है। 
यूँ तो सब यहाँ बस मगजमारी है।।

जाने कितने तालों में बंद करके जिंदगी।
हमने खुशियां खुद से ही अपनी रौंदी हैं।।

एक बार पीठ थपथपा तो दो जरा प्यार से।
हार को भूल जीत जाता हर खिलाड़ी है।।

ख्वाबों के महल खड़े होते नहीं बगैर सींचे पसीने से। 
देनी तो पड़ती है हमें कभी न कभी कोई कुर्बानी है।।

यार तेरी वो खनक अब सुनाई नहीं देती आवाज में।
बता तो सही यूँ दोस्तों से बातें छुपाई नहीं जाती है।।

आबे हयात* भरा जाम मिल रहा है "उस्ताद" सबको। 
सही मायने में सजी अब महफिल जश्न ए आजादी है।।
*अमृत 

नलिनतारकेश @उस्ताद

Thursday, 11 August 2022

446: ग़ज़ल एक अटपटी सी

एक ग़ज़ल कुछ अटपटी सी
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दर्दे दिल को हमारे समझ सके बना कहाँ ऐसा आला है। शरबती निगाहों का यूँ भी बिकता बड़ा महंगा काढ़ा है।।

नादानियां बुढोती में कराती हैं अजब बचकानी हरकतें।
बुतखाने जाने की उम्र में हैं पूछते यहाँ,कहाँ मयखाना है।।

सीरत पर तो नहीं हां खुद की सूरत पर पूरा भरोसा था।
मगर खुलता ही नहीं मोबाइल के पासवर्ड का ताला है।।

किसी रकीब को देकर इज़्ज़त अफ़जाही से अपनी बहन। लेता है जो ता-उम्र बदला कसम से वही असल साला है।।

हर शहर में अपने कारीगरी से बड़ा कमाया नाम जिसने। हुजूर वो हुनरमंद फनकार मुँह में आपके ठुंसा मसाला है।

जुल्फें सफेद हो गई मगर दिल तो काला,स्याह ही रहा।
असल जिंदगी का "उस्ताद" यही तो गड़बड़झाला है।

नलिनतारकेश @उस्ताद

Wednesday, 10 August 2022

445:ग़ज़ल

अब तो बस एक तेरी चौखट ही मेरा सहारा है।
वरना तो बता कौन यहाँ मेरा चाहने वाला है।।

सूरज चांद तारों ने तो लिख दिया मेरा नसीब। 
बदल सकता है बस तू अब तेरा ही आसरा है।।

सुनाऊं किससे मैं अपने दर्द ओ गम की कहानी।
हौंसला देकर बस तू ही तो एक सुनने वाला है।।

चरागों को मेरे जब तेल मयस्सर नहीं जलने की खातिर।  भला तेरे सिवा कौन यहाँ मुस्तकबिल बदलने वाला है।।

कमरों की दीवारों में तो अब होने लगी है यार घुटन।
हवामहल में रहने का शौक हमने यूँ ही नहीं पाला है।।

कभी थोड़ी-बहुत हमारी भी सुन लिया कीजिए।
आखिर कहें क्या कुछ हमने आपका बिगाड़ा है।।

"उस्ताद" तुम खामखां कसम से रोते बहुत हो।
देखो टूटी कश्तियों को भी तो वही पार लगाता है।।

नलिनतारकेश @उस्ताद