Saturday, 13 January 2018

#justice for #chandal chokri

कमान किसके हाथ चांडाल चौकड़ी की रही है।
छुपी नहीं बात यह सबको जगजाहिर रही है।।

फूस की झोपड़ी पर रख अंगार बहुत संजीदा होकर।
तपाने को अपना नंगापन उनकी अलाव जल रही है।।

खतरे में है जमहूरियत यह तो फैशन हो गया अब।
मक्कारी दरअसल इनकी इससे ही तो चल रही है।।

होती हो तो हुआ करे आलिम फाजिल इनकी बिरादरी।
बैठ काटते उसी डाल कहो कौन समझदारी रही है।।

बिल में हाथ डाल जब से कुचलने लगे फन "उस्ताद" तुम।
लामबंद गद्दारों की टोली बेनकाब हो रही है।।

@नलिन #उस्ताद

Friday, 12 January 2018

दीदार के वास्ते आया

दीदार के वास्ते आया बहुत दूर से वो तो। मोबाइल में उलझा मिला मगर उसे शख्स वो तो।।

मजलूम को सताता ही रहा हर दिन वो तो। भुगतेगा जरूर उसकी आह एक दिन वो तो।।

हर हाल बहुत दौड़ा-भागा मंजिल को पाने के वास्ते।
चूमता है कामयाबी की बुलंदी तभी आज वो तो।।

गले लगा चूमने की हौस उसे दिल ही रह गई।
परदेश गया छोड़ मुझे जबसे कमाने वो तो।।

नगद अब कुछ नहीं जब से डिजिटल सब हो गया।
वजूद पर तबसे खुद का ढूढता है वो तो।।

चढा कर उसे सलीब में सब गमगीन हो गए। रहा चुपचाप सब जानता था वो तो।।

गंडा बाॅध शागिर्द तो बन गया पहले अदब से। छठी का दूध दिला रहा याद"उस्ताद"अब वो तो।।

@नलिन #उस्ताद

Wednesday, 10 January 2018

गजल-81 दिल टूटता है शायर का

दिल टूटता है शायर का तो ग़ज़ल होती है।
टूटे अगर दिल फकीर का तो खलल होती है।।

लाख चाहो किसी को कितना भी शिद्दत से तुम मगर।
पाक मुहब्बत तुलसी,मीरा की ही असल होती है।।

हर गलत-सही बात पर जो देती है गुरु-मंत्र हमको।
दिखाने में रास्ता वो रूह-ए-आंख कुशल होती है।।

अदाएं कनखियों से मारने की क्या कहिए उसकी।
शमशीर तो बस यूं ही बदनाम केवल होती है।।

जुल्फ दर जुल्फ हर लट सुलझाने जो चले। जाना तब जिंदगी और गरल होती है।।

धुंध जमी है जो अपने बीच फासले की।
देखें कब हम पर रोशनी अमल होती है।।

"उस्ताद" अब तुम ना समझे तो समझेगा कौन भला।
होती है हर बात वही जो उसकी पहल होती है।।

@नलिन #उस्ताद

Saturday, 6 January 2018

दंगा कराने में

बातें बड़ी जो हमेशा वतन की खातिर करता रहा है।
दंगा कराने में हाथ उसका ही तो शामिल रहा है।।

मेहमानों का हंसी-ठट्ठा दूर तक गूंज रहा है। गरमा-गरम पकवान वो तो तन्हा तल रहा है।।

दिल के करीब होने की जिसने कभी कसम खायी।
आज वो ही उसके लिए सबसे अनजाना रहा है।।

खुले आकाश छोड़ दो परिंदों की तरह बच्चों को।
अपना नसीब लिखने वो तो खुद ही काबिल रहा है।।

ये जुल्फें बिखरी हुई चकोर सी बेचैन आंखें। लगता है उसे भी किसी से अब इश्क हो रहा है।।

जाड़ों की धूप को पसर कर छत पर सेकते हुए।
सूरज का तहे दिल से शुक्रगुजार हो रहा है।।

जाड़ा,गर्मी,बरसात हर घड़ी कड़ी मशक्कत करी  जिसने।
जाने क्यों उसे जमाना दो कौड़ी मजदूर कह रहा है।।

दौलत शोहरत तो सब बटोर ली उसने दोनों हाथ से।
मगर मालूम नहीं उसे ये हुआ की जमीर मर रहा है।।

पतंग की डोर चलो माना तुम्हारे हाथ है मगर। हवाओं का रुख मगर कहो कहां किसके हाथ रहा है।।

उसकी आंखों का नूर अजब अलहदा सा दिखा।
भीतर का"उस्ताद"दरअसल अब निखर रहा है।।

@नलिन #उस्ताद

Friday, 5 January 2018

ऑखों से पीकर समुंदर

आंखों से पीकर समुंदर दुःखों का क्या अजूबा हो गया।
नमकीन,चिपचिपा,गहराई में डूब वो चुप हो गया।

रंगे सियार सा बुजदिल चूड़ियों की आवाज से जो डर रहा।
नापाक दामन उसका जगजाहिर देखो आज यूं हो गया।।

आंखों में सपने हजार लिए वो गांव छोड़ शहर आया।
जमीन का बचा एक अदद टुकड़ा भी अब गिरवी हो गया।।

रेत में चलते हुए पानी की प्यास वाजिब थी। सो आंख से बहता हर एक अश्क दरिया हो गया।।

आकाश जमीन मिलते हैं दूर कहीं सुना था। खोजते-खोजते वो तो कहीं खुद ही खो गया।।

लिपा-पुता मकान तो अलग भला सा दिखता है मगर।
देखना जरा खोखला ना कहीं वो भीतर हो गया।।

जीना आसान नहीं मगर मरना भी कब आसान हुआ कहो तो।
खुद को भुला जब लौ उसकी लगी तो सब ये आसान हो गया।।

खुद ही नकारते हैं पहले फिर भरते हैं हामी खुद ही।
राजनीति का देखिए अजब मिजाज महबूबा सा हो गया।।

जाने क्यों बेवजह लिख रहे"उस्ताद"हर रोज कलाम।
चलन कलम के दुआ सलाम का एक अरसा कजा हो गया।।

@नलिन  #उस्ताद

Wednesday, 3 January 2018

मुबारक नया साल


मुबारक हो बहुत आपको नया साल जो आया पूरे हों अरमान आपके नया साल जो आया।।

हर दिन डाले रहे खुशियां आपके कूचे पर डेरा।
महफिल-ए-दौर चलता रहे,सुबह-शाम नया साल जो आया।।

जोश-ए-जज्बात का छलकता रहे आपका मस्ती भरा प्याला।
कुछ कर दिखाने का आंखों में हो जुनून, नया साल जो आया।।

लुत्फ उठाएं हर एक पल का बिंदास बेखौफ आप।
मंजिल चूमें कदम आपके,नया साल जो आया।।

आन-बान-शान रहे बढ़ती चौगुनी हर एक दिन- रात आपकी।
"उस्ताद"बहार-ए-चमन करे इस्तकबाल नया साल जो आया।।

@नलिन #उस्ताद

Monday, 1 January 2018

माॅ सिद्धि श्रद्धासुमन

माॅ स्मरणांजलि
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जय जय मां"कात्यायनी",सकल "सिद्धि"प्रदायनी श्री अंबे।
जगत दुःख कष्ट व्याधि निवारणी,सकल मंगल कारिणी श्री अंबे।।

आतॆ हृदय पुकार सुन पल में,रचती तू शुभ मंगल विधान पल में।
त्रसित जन मुख म्लान विहसते,तव चरण"नलिन" ध्यान कर उर में।।

जय जय मां"कात्यायनी"सकल "सिद्धि"प्रदायनी श्री अंबे।
जगत दुःख कष्ट व्याधि निवारणी सकल मंगलकारिणी श्री अंबे।।

षड्-रिपु मधु कैटभ रुप धर अनेक,विचलित करते तन-मन।
आओ माॅ खड्ग खप्पर हाथ धर, मर्दन कर हरो भू-भार सकल जन-मन।।

जय जय मां"कात्यायनी"सकल "सिद्धि" प्रदायनी श्री अंबे।
जगत दु:ख कष्ट व्याधि निवारणी,सकल मंगलकारणी श्री अम्बे।।

सकल ब्रह्मांड तेरा भ्रू-विलास,विराजती शिव संग वामांग।
हम अति विनत भाव सुत तेरे,करते तुझे पुलक तन प्रणाम साष्टांग।।

जय जय जय मां"कात्यायनी"सकल "सिद्धि" प्रदायिनी श्री अंबे।
जगत दु:ख कष्ट व्याधि निवारण सकल मंगल कारिणी श्री अंबे।।

माॅ,माॅ,माॅ नित रटते रहें सदैव आठों याम, दो अब ऐसा हमें वरदान।
कल्पवृक्ष सी छत्रछाया का तेरा कृपा-आधार बने हम सबका अधिष्ठान।।

जय जय मां"कात्यायनी"सकल "सिद्धि" प्रदायनी श्री अंबे।
जगत दुःख कष्ट व्याधि निवारिणी सकल मंगल कारिणी श्री अंबे।।

@नलिन #तारकेश