Friday, 2 August 2024

बालि प्रदेश (इंडोनेशिया) की प्राकृतिक सौंदर्यता का गान###############################

नेत्र निर्निर्मेष निहारते हैं प्रकृति के उद्दात सौन्दर्य को।
हम हैं भूलोक में या उड़कर आ गए हैं ‌‌स्वर्गलोक को।।
ऐसे अद्भुत परिदृश्य की थी किसे परिकल्पना स्वप्न में।
पर यहां ये हो रहा है साकार मूर्तमान विलक्षण रूप में।।
हरियाली ही हरियाली छाई है नयनों की सीमा पार कर।
ईश्वरीय है ये असीम अनुकम्पा जो मिल रही कृपा कर।।
उन्नत पहाड़ियों की संकरी,सर्पीली,सड़कों  में चलकर।
अत्यंत रमणीय नयनाभिराम दृश्य आते हैं हृदय छूकर।।
रात्रि का नीरव सन्नाटा हो या हो प्रभात का अप्रतिम रूप।
अवलोकन हर घड़ी हमें दृश्यमान कराता है अद्भुत रूप।।
बालि प्रदेश मंत्रमुग्ध हूं जितना भी कर पा रहा सौंदर्य पान।अकथनीय,अवर्णनीय रूप का नेत्र करें कैसे सम्पूर्ण पान।

नलिन "तारकेश"

Thursday, 1 August 2024

663: Gazal: कुछ निगाहें बोलती ही लगती हैं

कुछ निगाहें बोलती ही लगती हैं।
बन्द हों तो भी देखती लगती हैं।।
इतना घूम रहे हैं आजकल हम।
सारी सड़कें एक सी दिखती हैं।।
मंजिलें जुदा हैं हर बार के सफर में।
फ़ज़ल से खुदा के सुहानी मिलती हैं।।
इज़हार किया तो है कई बार हमने।
किस्मत कहां मगर जरा सुनती है।।
एक छोर से दूसरे छोर तक उस्ताद।
हर जगह तेरी ही याद बनी रहती है।।

नलिन "उस्ताद"