Tuesday, 1 September 2026

सादर श्रद्धा-सुमन "रब्बू" दा

सादर श्रद्धा-सुमन "रब्बू" दा
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पंचतत्व में हुई विलीन रब की खुशबू*आज।(रब्बू)
रीता-घट यह मेरा हुआ,मौन हो गया साज़।।

जाने कितनों को कृपा दिलाई मां महाराज के हाथ।
दु:ख में अपने छोड़ा लेकिन,कभी न गुरु का साथ।

हंसते,रोते,झूमते दिल में पैठ रही यही एक बात।
श्रीचरण युगल सरकार के करते सदा करामात।।

शहंशाह की तरह गुज़ारी,कंगाली की हर रात।
मिली जो शानो-शौकत तो,खूब लुटाई सौगात।।

बाबा नीबकरौरी का मिला आपको,अल्प-आयु सानिध्य।
देश विदेश जाने कहां-कहां,किए हनुमत काज वैविध्य।।

सिद्धि मां और जीवंती के आप बने,अत्यंत लाड़ले लाल।
मां-महाराज चरित्र लिख वर्णित किया,अद्भुत-बेमिसाल।।


अपने प्रभु श्रीराम से करते,हम सब यही दरकार।
भवसागर से इस भगत को पार लगा दें सरकार।।

"नलिन" न कुम्हलाए आपका,यही आपसे आस।
नील गगन से इसको देना,अपना सा ब्रह्मोल्लास।।


अनुज
नलिन "तारकेश"


4 comments:

  1. बहुत सुंदर भाई

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  2. बहुत सुंदर 👌

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  3. अति सुंदर सीता राम 🙏

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  4. Om Shanti 🙏🙏

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