Saturday, 15 August 2026

६८५: ग़ज़ल १५/८/२०२६

माटी का मोल,अनमोल कहां समझते हैं लोग।
चिकनी टाईल्स पर जबसे चलने लगे हैं लोग।।

देश की खातिर बलिदान की बातें कौन कहे।
वंदेमातरम् कहने से ही जब कतराते हैं लोग।।

झंडा फहराने की बातें भी सब अब इसलिए हैं।
सोशल मीडिया-सेल्फी की होड़ में जुटे हैं लोग।।

सुभाष,चंद्रशेखर,बिस्मिल थे कभी भारत के हीरो।
सुन कौमी तराने जेनजी के कोमा में पड़े हैं लोग।।

तालीम ही जब बांटने की दे रहे नाम़ाकूल "उस्ताद"।
कोढ़ में खाज़ की‌ बेवजह शिकायत करते हैं लोग।।

नलिन"उस्ताद"

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