Monday, 3 June 2024

ग़ज़ल ६२१:लोकसभा चुनाव २०२४ परिणाम

मुकाबला के नतीजे तो कल आ ही जाएंगे हुजूर फटाफट।  
देखें फिर भला कौन रहता है हावी और कौन है सफाचट।।

यूं तो सभी सर्वे कर रहे हैं जयघोष मोदी के ही आने का।
अब देखिए 400 पार भी होगा क्या आसानी से सटासट।।

अगर यूं ही रही सर्वे की भविष्यवाणी पूरी तरह सच्ची। गठबंधन फिर भला किस पर फोड़ेगा ठीकरा चटाचट।।

यूं  तो अब हर कोई अपने शगुफे छोड़ने में बड़ा माहिर है। 
आम जनता पर अभिशप्त,भोगती हर बार यही परिशिष्ट।।

"उस्ताद" यूं तो अपना राजनीति से दूर तलक नहीं है वास्ता। 
दिली इच्छा है पर बने वही सरकार जो कभी न हो पथभ्रष्ट।।

नलिन "उस्ताद"

Saturday, 1 June 2024

६२०: ग़ज़ल - उजालों की तमन्ना में

उजालों की तमन्ना में क्यों अंधेरों से हाथ मिलाया। 
आख़िर दिल दिमाग तो होशो हवास में है आपका।।

कोई कभी तो खटखटा जाए मेरे घर का दरवाजा।
केवल यही सोच आनॅलाइन शापिंग हूं करने लगा।।

दोजख की आग में जल रहे हैं लोग अब खुद से।
अंजाम ये तो होना तय था नासमझ विकास का।। 

एक बूंद पानी की कदर समझ लो बरख़ुरदार मेरे।
पड़ेगा वरना बेबस मछली सा रेत पर तड़फड़ाना।।

"उस्ताद" हमारा हुनर तो हमें बखूबी पता है जान लो।
ज़िद पर उतरें तो सच में तब्दील होता है हरेक सपना।।

नलिन "उस्ताद"