टेसू के फूल शरबती आंखों में खिल रहे।
यार के संग अपने जब हम गले मिल रहे।।
रंगो का त्यौहार जब शबाब पर आया।
सुरूर तो छाया पर ये लब हैं सिल रहे।।
एक दिन जब वो मिलने को कह गए।
रात सारी ख्वाब रंगीन देखते दिल रहे।।
मौसम की तरह बदलते दिखते हैं सब लोग।
कहो कौन अब जो ज़ुबां ए मुस्तकबिल रहे।।
बस फरियाद,आरजू तुझसे एक यही यारब।
बगैर "उस्ताद" जेहन न तेरा मुन्तक़िल रहे।।
नलिन "उस्ताद"
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